धनतेरस के दिन घर पर ये 7 चीजें लाने से बढ़ती हैं लक्ष्मी जी की कृपा!: सोने-चांदी ही नहीं, ये चीजें खरीदना भी माना जाता है शुभ, जानिए इस दिन किन सामानों को खरीदने से करना चाहिए परहेज?
धनतेरस के दिन घर पर ये 7 चीजें लाने से बढ़ती हैं लक्ष्मी जी की कृपा!

धर्म: दिवाली की तैयारियों के बीच धनतेरस की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि इस साल यह पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा या 7 नवंबर को। अगर आप भी इस दिन खरीदारी की योजना बना रहे हैं तो तारीख और पूजा का शुभ समय जान लेना जरूरी है। इस बार धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसी दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाएगी। वहीं, 7 नवंबर को छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शुभ समय में खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक बनती हैं। यही वजह है कि लोग अपनी क्षमता के अनुसार सोना-चांदी, बर्तन और दूसरी उपयोगी चीजें खरीदते हैं।

धनतेरस 2026: तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

आपको बता दें कि इस वर्ष त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह लगभग 10:47 बजे तक रहेगी। उदया तिथि और प्रदोष काल के आधार पर धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा।

धनतेरस पूजा का सामान्य शुभ समय: शाम लगभग 6:02 बजे से 7:57 बजे तक।

इस दौरान भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है। ध्यान रखें कि पूजा मुहूर्त शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग या स्थानीय पुरोहित से समय की पुष्टि कर लें।

धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?

1. सोना और चांदी: इस दिन सोने-चांदी के गहने, सिक्के और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में धन-वैभव और समृद्धि आती है।

2. पीतल और तांबे के बर्तन: धनतेरस पर नए बर्तन खरीदने की पुरानी परंपरा है। खासतौर पर पीतल और तांबे के बर्तनों को शुभ माना जाता है। स्टील और कांसे के बर्तन भी लोग अपनी जरूरत के अनुसार खरीदते हैं।

3. झाड़ू: इस दिन नई झाड़ू खरीदने का विशेष महत्व माना जाता है। इसे मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है और घर से दरिद्रता दूर करने का प्रतीक माना जाता है।

4. साबुत धनिया: धनतेरस पर धनिया के बीज खरीदकर पूजा में रखने की परंपरा है। कुछ परिवार बाद में इन्हें गमले या बगीचे में बो देते हैं। इसे उन्नति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

5. लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति: दिवाली पूजा के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां खरीदना भी शुभ माना जाता है।

6. मिट्टी के दीये: धनतेरस पर मिट्टी के दीये, पूजा की थाली और अन्य पूजन सामग्री खरीदने की भी परंपरा है।

7. गोमती चक्र, कौड़ी और नमक: कई परिवार इन चीजों को भी शुभ मानकर घर लाते हैं। इन्हें सुख-समृद्धि और बरकत से जोड़कर देखा जाता है।

धनतेरस पर किन चीजों को खरीदने से करते हैं परहेज?

विदित है कि कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर लोहे का सामान, चाकू-कैंची जैसी धारदार वस्तुएं, काले रंग की चीजें और कांच का सामान खरीदने से बचना चाहिए। हालांकि, ये मान्यताएं हर क्षेत्र और परिवार में एक जैसी नहीं हैं। इन्हें अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाना चाहिए। इसके अलावा, कुछ परिवार नया बर्तन खाली घर लाने के बजाय उसमें पानी, चावल या मिठाई रखकर लाने की परंपरा निभाते हैं।

सोना-चांदी नहीं खरीद सकते तो परेशान न हों

महंगाई के कारण हर किसी के लिए सोना-चांदी खरीदना संभव नहीं होता। ऐसे में अपनी क्षमता के अनुसार साबुत धनिया, मिट्टी के दीये या कोई छोटा बर्तन खरीदकर भी धनतेरस की परंपरा निभाई जा सकती है। खरीदी गई वस्तुओं को साफ करके पूजा स्थल पर रखें और कुमकुम का तिलक लगाकर फूल अर्पित करें।

6 नवंबर को धनतेरस, 7 को छोटी दिवाली और 8 को मुख्य दिवाली

इस बार त्योहारों की तारीखों का क्रम इस प्रकार रहेगा:

  • 6 नवंबर, शुक्रवार: धनतेरस

  • 7 नवंबर, शनिवार: छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी)

  • 8 नवंबर, रविवार: मुख्य दिवाली और लक्ष्मी-गणेश पूजा

  • 10 नवंबर, मंगलवार: गोवर्धन पूजा

  • 11 नवंबर, बुधवार: भाई दूज

इसलिए खरीदारी और पूजा की तैयारी करते समय तारीखों को लेकर भ्रमित न हों। धनतेरस पर महंगी वस्तु खरीदना जरूरी नहीं है। त्योहार का महत्व श्रद्धा, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशियों से जुड़ा है।

डिसक्लेमर: धार्मिक विषयों से जुड़ी जानकारी विभिन्न पंचांगों, पारंपरिक मान्यताओं और धार्मिक स्रोतों पर आधारित है। अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों के अनुसार पूजा-विधि एवं मान्यताओं में भिन्नता हो सकती है। इस खबर में दी गयी सूचना और तथ्यों की सटीकता के लिए NCR पत्रिका उत्तरादायी नहीं है।

अन्य खबरे