बंगाल में ऐतिहासिक जीत के साथ 22 राज्यों में काबिज हुई NDA!: 2013 में मात्र 7 राज्यों में, वहीं 1977 के बाद पहली बार...जानें BJP का 7 राज्यों से 22 राज्यों तक सफर_एक नज़र
बंगाल में ऐतिहासिक जीत के साथ 22 राज्यों में काबिज हुई NDA!

नई दिल्ली : 2026 के चुनावी नतीजों ने भारत का सियासी नक्शा बदल दिया है। सबसे बड़ा बदलाव पश्चिम बंगाल में हुआ, जहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता पर कब्जा जमाकर इतिहास रच दिया। 15 साल से शासन कर रही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सरकार ढह गई और ममता बनर्जी खुद अपनी सीट तक नहीं बचा सकीं।

अब कैसा है देश का सियासी नक्शा?

आपको बता दें कि ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के 31 में से 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में NDA की सरकार है। इनमें 17 राज्यों में सीधे BJP के मुख्यमंत्री हैं यानी करीब 72% क्षेत्रफल और 76-78% आबादी पर भाजपा का असर है। भारत का बड़ा हिस्सा अब एक ही राजनीतिक धुरी के आसपास घूमता दिख रहा है।

‘मोदी मैजिक’ या रणनीति की जीत?

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को इस जीत का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। नरेंद्र मोदी के आने से पहले बीजेपी की 2013 में सिर्फ 7 राज्यों में सत्ता और 773 विधायक थे। 2026 में 22 राज्यों में सरकार के साथ कुल 1798+ विधायक हैं। यह सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि जमीनी विस्तार और संगठन की ताकत का नतीजा माना जा रहा है।

जानें किन 22 राज्यों/UT लहरा रहा NDA/BJP का झंडा?

2026 के चुनावी परिदृश्य के अनुसार NDA/भाजपा शासित 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की पूरी लिस्ट निम्नलिखित है:

  1. उत्तर प्रदेश
  2. मध्य प्रदेश
  3. राजस्थान
  4. गुजरात
  5. महाराष्ट्र (सहयोगी दलों के साथ)
  6. बिहार (NDA गठबंधन)
  7. हरियाणा
  8. उत्तराखंड
  9. असम (सहयोगियों के साथ)
  10. अरुणाचल प्रदेश
  11. त्रिपुरा
  12. मणिपुर
  13. नागालैंड (गठबंधन)
  14. मेघालय (गठबंधन)
  15. गोवा
  16. छत्तीसगढ़
  17. ओड़िशा
  18. आंध्र प्रदेश (TDP+NDA)
  19. दिल्ली
  20. पुदुचेरी (NDA गठबंधन)
  21. सिक्किम (सहयोगी समर्थन)
  22. पश्चिम बंगाल (नई एंट्री, 2026)

एक नजर में तस्वीर

कुल: 22 राज्य/UT
सीधे भाजपा सरकार: लगभग 17
बाकी जगह: गठबंधन (NDA)

ये तीनों संकेत बताते हैं कि क्षेत्रीय सीमाएं अब टूट रही हैं।

विपक्ष कहां खड़ा है?

गौरतलब है कि विपक्षी दलों की स्थिति अब सीमित राज्यों तक सिमटती दिख रही है:

इंडियन नेशनल कांग्रेस की सरकार:

कर्नाटक
तेलंगाना
हिमाचल प्रदेश

क्षेत्रीय दलों का दबदबा:

पंजाब (AAP)
तमिलनाडु (DMK गठबंधन) (अब TVK की सरकार बनेगी)
केरल (UDF)

यानी विपक्ष अब टुकड़ों में बंटा हुआ नजर आता है।

वामपंथ का लगभग अंत

विदित है कि एक समय देश की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले वाम दल अब लगभग खत्म हो चुके हैं। नए चुनावी नतीजों से केरल भी हाथ से निकलने के बाद देश में कोई भी राज्य वाम सरकार के पास नहीं है। 1977 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है।

विपक्ष क्यों पिछड़ता दिखा?

इंडियन नेशनल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल कई राज्यों में सिमटते नजर आए। कई जगह गठबंधन कमजोर नजर आया। क्षेत्रीय दलों पर निर्भरता बढ़ी है। और एकजुट रणनीति की कमी भी दिखी है। नतीजा यह हुआ कि सीधी टक्कर में भाजपा को हर जगह बढ़त मिल रही।

चुनावी जीत से विकास की राजनीति को बढ़त?

विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत केंद्र और राज्य तालमेल, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश योजनाओं को गति, और नीति लागू करने में तेजी—यही कारण हैं कि कई राज्यों में मतदाता स्थिर सरकार को प्राथमिकता दे रहे हैं।

2026 के चुनाव सिर्फ सरकार बदलने की कहानी नहीं हैं।
ये संकेत हैं कि भारत की राजनीति अब एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां एक मजबूत राष्ट्रीय पार्टी का दबदबा है। वहीं क्षेत्रीय दलों की सीमित भूमिका दिखाई पड़ रही है और विपक्ष के सामने अस्तित्व की चुनौती खड़ी है। साफ है कि देश का सियासी नक्शा अब पहले जैसा नहीं रहा, बल्कि पूरी तरह नया आकार ले चुका है।

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