नोएडा में समाजवादी समता रैली में जमकर गरजे पूर्व CM अखिलेश!: बोले - 'यूपी के 7 में से 6 एयरपोर्ट बंद, क्या जेवर एयरपोर्ट भी बेचा जाएगा?’, दादरी रैली में सरकार पर लगाए ये गंभीर आरोप वहीं गुर्जर वोटबैंक...जानें 2027 चुनाव के मद्देनजर इस रैली के सियासी मायने_एक नजर
नोएडा में समाजवादी समता रैली में जमकर गरजे पूर्व CM अखिलेश!

नोएडा/दादरी : उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। दादरी में आयोजित ‘समाजवादी समता भाईचारा रैली’ में उन्होंने कहा कि “लगता है एयरपोर्ट का उद्घाटन बेचने के लिए किया गया है!” उनके इस बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

“उद्घाटन के बाद बेचने का प्लान?”; सीधा आरोप

आपको बता दें कि अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपी के 7 में से 6 एयरपोर्ट बंद हो चुके हैं। कम से कम यह भरोसा तो दिया जाता कि नया एयरपोर्ट बेचा नहीं जाएगा। उनका तंज इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के नाम पर “निजीकरण” की आशंका पर था।

“जिसने घर धुलवाया, वो दर्द क्या समझेगा…” बोलकर किया भावनात्मक वार

गौरतलब है कि रैली में अखिलेश यादव ने पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि “जिसने अत्याचार और अपमान नहीं झेला, वो हमारा दर्द नहीं समझ सकता। जब हमारे घर को गंगाजल से धुलवाया गया, तब हमने वो दर्द महसूस किया”

यह बयान सीधा सामाजिक और भावनात्मक मुद्दों को छूता दिखा।

2027 चुनाव का बिगुल? पश्चिमी यूपी पर फोकस

विदित है कि यह रैली सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का संकेत भी मानी जा रही है।
दादरी से अभियान की शुरुआत।
पश्चिमी यूपी के 32 जिलों से भारी भीड़।
गुर्जर, पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोटबैंक पर फोकस इस रैली को और खास बनाती है।
खास बात यह है कि गुर्जर वोटबैंक, जो अब तक भाजपा का मजबूत आधार माना जाता रहा है।

गुर्जर समीकरण पर सपा की नजर

पश्चिमी यूपी की लगभग 24 सीटों पर गुर्जर मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। कई सीटों पर 20,000 से 70,000 तक गुर्जर वोट। सपा की कोशिश इन्हें मिलाकर नया सामाजिक समीकरण बनाना है। अगर 20–25% वोट भी शिफ्ट हुए, तो कई सीटों का गणित बदल सकता है।

नोएडा से ही क्यों शुरुआत?

आपको बता दे कि अखिलेश यादव ने खुद साफ किया कि नोएडा सपा का कमजोर क्षेत्र रहा है। वे यहीं से शुरुआत कर संगठन की ताकत परखना चाहते हैं। यह रैली स्थानीय नेताओं के “दावों की सच्चाई” जांचने की रणनीति भी है।

मोदी बनाम अखिलेश; सीधी सियासी टक्कर

एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। पीएम ने विकास मॉडल पर जोर दिया। अगले ही दिन अखिलेश ने उसी प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े कर दिए।

लोकसभा के नतीजों से बढ़ा सपा का आत्मविश्वास

आपको बता दें कि 2024 लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 43 सीटें जीतकर चौंकाया था। यानी पश्चिमी यूपी में भी अच्छा प्रदर्शन किया था। अब सपा उसी लय को 2027 तक ले जाना चाहती है।

नोएडा की इस रैली ने साफ कर दिया है कि जेवर एयरपोर्ट सिर्फ विकास का मुद्दा नहीं रहेगा यह अब सियासी बहस का केंद्र बन चुका है। एक तरफ सरकार इसे “इकोनॉमिक गेमचेंजर” बता रही है, दूसरी तरफ विपक्ष इसे “निजीकरण और जमीनी हकीकत” का मुद्दा बना रहा है यानी 2027 की सियासी लड़ाई अब शुरू हो चुकी है।

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