सुप्रीम कोर्ट को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला!: SC में जजों की संख्या 34 से बढ़कर होगी 38, कैबिनेट ने लगायी मुहर, वहीं 1956 में...जानें क्यों बढ़ाई गई जजों की संख्या और इसके फायदे_एक नजर
सुप्रीम कोर्ट को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला!

नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया में अब न्याय की रफ्तार तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए सुप्रीम Court में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। अब तक देश की सर्वोच्च अदालत में मुख्य न्यायाधीश समेत कुल 34 जजों की व्यवस्था थी, लेकिन अब इस संख्या को बढ़ाकर 38 किया जाएगा। यानी अदालत में चार नए जज और बैठेंगे। सरकार का दावा है कि इससे वर्षों से लंबित पड़े मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और आम लोगों को जल्द न्याय मिल सकेगा।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में आएगा बिल

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार संसद के अगले सत्र में इससे जुड़ा विधेयक पेश करेगी। उन्होंने कहा कि अभी सुप्रीम कोर्ट में:

  • 1 मुख्य न्यायाधीश (CJI)
  • 33 अन्य न्यायाधीश

कार्यरत हैं। नया कानून पास होते ही यह संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी।

आखिर क्यों बढ़ानी पड़ी जजों की संख्या?

गौरतलब है कि देश की अदालतों में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट में भी हजारों मामले वर्षों से लंबित पड़े हैं। इनमें संवैधानिक विवाद, राज्यों के बीच टकराव, नागरिक अधिकारों से जुड़े केस और दीवानी और फौजदारी अपीलें शामिल हैं। जजों की कमी के कारण कई अहम मामलों की सुनवाई में देरी हो रही थी।

अब क्या बदलेगा?

विशेषज्ञों के अनुसार जजों की संख्या बढ़ने से:

  • ज्यादा बेंच बन सकेंगी
  • संविधान पीठ के मामलों की सुनवाई तेज होगी
  • लंबित केसों का दबाव कम होगा
  • आम लोगों के मामलों का निपटारा जल्दी होगा
  • न्यायिक प्रक्रिया की रफ्तार बढ़ेगी

1956 में सिर्फ 10 जज, अब पहुंचेंगे 38 तक

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की ताकत धीरे-धीरे बढ़ती गई है।

जजों की संख्या का सफर:

1956 → 10 जज

1960 → 13

बाद में → 17

1986 → 25

2009 → 30

2019 → 33 + CJI

अब 2026 → 38 तक बढ़ाने की तैयारी

यानी करीब 70 साल में सुप्रीम कोर्ट की संरचना तीन गुना से ज्यादा बड़ी हो चुकी है।

क्या इससे आम आदमी को मिलेगा जल्दी इंसाफ?

सरकार का कहना है कि यह फैसला सिर्फ अदालत का विस्तार नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। देश में अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि “न्याय में देरी, क्या न्याय से इनकार के बराबर है?” ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाना न्याय व्यवस्था के लिए बड़ा सुधार माना जा रहा है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब सबकी नजर संसद के अगले सत्र पर है, जहां यह विधेयक पेश होगा। अगर संसद से मंजूरी मिल जाती है, तो देश की सबसे बड़ी अदालत पहले से ज्यादा बड़ी, मजबूत और तेज न्याय देने वाली संस्था बन सकती है।

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