बिना बीमा वाली गाड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त!: ऐसे वाहनों को पेट्रोल नहीं देने की तैयारी...जानें पेट्रोल से लेकर ई-चालान तक क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश?
बिना बीमा वाली गाड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त!

 

नई दिल्ली: सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध थर्ड-पार्टी बीमा के चल रहे वाहनों पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) को मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इस व्यवस्था के तहत भविष्य में जिन वाहनों का वैध थर्ड-पार्टी बीमा नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जा सकेगा।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का निर्देश?

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना थर्ड-पार्टी बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं, जिससे सड़क हादसों के पीड़ितों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता। अदालत ने सुझाव दिया कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से पहले वाहन के बीमा की स्थिति डिजिटल तरीके से जांची जाए। इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों और वाहन पोर्टल के डेटा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

देश में 56% वाहन बिना बीमा

संसदीय समिति की 2024-25 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि देश में करीब 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं, जो कुल वाहनों का लगभग 56% है। अदालत ने इसे बेहद गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी बीमा सभी वाहनों के लिए अनिवार्य है।

नई गाड़ियों के लिए बढ़ी बीमा अवधि

सुप्रीम Court ने 2018 के अपने पुराने आदेश में भी संशोधन किया है। अब नई चारपहिया गाड़ियों के लिए 4 वर्ष और नई दोपहिया गाड़ियों के लिए 6 वर्ष का थर्ड-पार्टी बीमा लेना अनिवार्य होगा। अदालत ने IRDAI को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस को मिलेंगे डिजिटल उपकरण

गौरतलब है कि अदालत ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि ट्रैफिक पुलिस को ऐसे मोबाइल ऐप या हैंडहेल्ड डिवाइस उपलब्ध कराए जाएं, जिनकी मदद से मौके पर ही किसी भी वाहन का बीमा स्टेटस जांचा जा सके। यदि वाहन बिना बीमा पाया जाता है तो तुरंत ई-चालान जारी किया जा सकेगा।

टोल प्लाजा पर भी बदलेगी व्यवस्था

विदित है कि सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर लंबी कतारों और सड़क हादसों को देखते हुए कुछ हाईवे पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का सुझाव दिया है। इसके तहत ANPR कैमरों की मदद से वाहनों की पहचान कर बिना रोके ही टोल वसूला जा सकेगा। साथ ही बीमा सूचना ब्यूरो और वाहन पोर्टल से जुड़े सिस्टम के जरिए बिना बीमा वाले वाहनों पर स्वतः ई-चालान जारी करने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।

क्यों जरूरी है थर्ड-पार्टी बीमा?

अदालत ने स्पष्ट किया कि अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा केवल कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता और मुआवजा दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। बिना बीमा वाले वाहनों के कारण पीड़ितों को वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, इसलिए नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।

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