उत्तराखंड में आंगनबाड़ी, आशा व भोजन माताओं के लिए बड़ी खुशखबरी!: 70,000 से ज्यादा महिला कार्यकर्ताओं की मानदेय बढोतरी का प्रस्ताव तैयार, वही...जानें कब से लागू होगा फैसला?
उत्तराखंड में आंगनबाड़ी, आशा व भोजन माताओं के लिए बड़ी खुशखबरी!

देहरादून : उत्तराखंड की जमीनी स्तर पर काम करने वाली लाखों महिलाओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से कम मानदेय पर काम कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहुएं और भोजन माताएं अब जल्द आर्थिक राहत पा सकती हैं। राज्य सरकार इनके मानदेय में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है और इसके लिए अलग-अलग विभागों ने शासन को प्रस्ताव भी भेज दिए हैं। सरकार का मानना है कि शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य की पूरी व्यवस्था इन कार्यकर्ताओं के कंधों पर टिकी है, इसलिए इन्हें बेहतर आर्थिक सुरक्षा देना जरूरी है।

कितने लोगों को मिलेगा फायदा?

आपको बता दें कि सरकार के इस कदम से 40 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं, करीब 12 हजार आशा कार्यकर्ता और लगभग 24 हजार भोजन माताएं यानी कुल मिलाकर प्रदेश की 70 हजार से अधिक महिलाओं को इस फैसले से सीधा लाभ मिल सकता है।

अभी कितना मिलता है मानदेय?

गौरतलब है कि अभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को केंद्र सरकार की तरफ से ₹4500 प्रति माह और राज्य सरकार की तरफ से ₹4800 प्रति माह मिलते हैं। यानी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुल ₹9300 प्रतिमाह मानदेय पाती हैं। वहीं भोजन माताएं (पीएम पोषण योजना) को केंद्र हिस्सा ₹900 व राज्य हिस्सा ₹100 मिलता है। इसके साथ ही राज्य का अतिरिक्त भुगतान ₹2000 मिलने से कुल करीब ₹3000 प्रतिमाह पाती हैं। और आशा कार्यकर्ताओं को विभिन्न प्रोत्साहन आधारित भुगतान (फिक्स वेतन नहीं) मिलता है, जिसे बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल है।

सरकार ने क्या कदम उठाए?

गौरतलब है कि प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई। जिसके बाद महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग ने रिपोर्ट सौंप दी। शिक्षा व स्वास्थ्य विभागों ने अलग-अलग प्रस्ताव भेजे। साथ ही अन्य राज्यों के मानदेय से तुलना भी की गई। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ऐसा फॉर्मूला तैयार कर रही है जिससे इनका भुगतान “सम्मानजनक” स्तर तक बढ़ सके।

क्यों जरूरी है बढ़ोतरी?

आपको बता दें कि ये वही महिलाएं हैं जो बच्चों का टीकाकरण कराती हैं, गर्भवती महिलाओं की निगरानी करती हैं, कुपोषण से लड़ती हैं, स्कूलों में मिड-डे मील बनाती हैं औऱ गांव-गांव स्वास्थ्य जानकारी पहुंचाती हैं। महामारी के दौरान भी सबसे ज्यादा जिम्मेदारी इन्हीं पर रही, लेकिन आय बेहद कम रही।

कब तक लागू हो सकता है फैसला?

अभी अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होना बाकी है, लेकिन प्रस्ताव प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द कैबिनेट में रखा जा सकता है। माना जा रहा है कि आगामी बजट या विशेष घोषणा में इसका ऐलान हो सकता है।

क्या बदलेगा?

गौरतलब है कि सरकार के इस कदम से ग्रामीण महिला कर्मियों की आय बढ़ेगी। स्वास्थ्य व पोषण सेवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी। साथ ही महिला रोजगार व सम्मान दोनों को मजबूती मिलेगी।

संकेत साफ है सरकार जमीनी महिला वर्कफोर्स को सम्मानजनक मानदेय का दर्जा मिलने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। अगर फैसला लागू हुआ, तो उत्तराखंड में सामाजिक योजनाओं की रीढ़ मानी जाने वाली इन महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव आ सकता है।

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