ग्रेटर नोएडा के किसानों का बड़ा फैसला!: 10% भूखंड के लिए 'आर-पार' की लड़ाई की तैयारी, किसानों ने सीएम योगी से सीधी मुलाकात का बनाया प्लान, जानें कैसे 2011 का समझौता बना आज की लड़ाई की नींव? पूरा मामला_एक नजर
ग्रेटर नोएडा के किसानों का बड़ा फैसला!

नोएडा : ग्रेटर नोएडा की जमीन पर एक बार फिर बड़ा आंदोलन आकार लेता दिख रहा है। 10 प्रतिशत आबादी भूखंड की मांग को लेकर किसान अब निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं। Bharatiya Kisan Union (अराजनीतिक मंच) के नेतृत्व में किसानों ने साफ कर दिया है कि अब यह सिर्फ मांग नहीं, बल्कि अधिकार की लड़ाई है।

महापंचायत में ऐलान; अब समझौता नहीं, सीधी टक्कर

गौरतलब है कि राष्ट्रीय सचिव Chaudhary Prakash Pradhan के नेतृत्व में हुई बैठकों में किसानों ने “आर-पार” का फैसला लिया। रीलखा और दनकौर में करीब 500 किसानों की महापंचायत हुआ जिसमें गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान और एकजुट होकर आंदोलन तेज करने का संकल्प लिया गया। स्पष्ट संदेश है कि या तो अधिकार मिलेगा, या आंदोलन और उग्र होगा।

सीएम योगी से सीधी मुलाकात की तैयारी

विदित है कि किसानों ने हाल ही में Jayant Chaudhary से मुलाकात की, जहां उन्हें भरोसा दिया गया कि सरकार उनकी बात सुनेगी। अब अगला कदम Yogi Adityanath से सीधी मुलाकात होगी। किसानों को उम्मीद है कि इस बार समाधान निकल सकता है, लेकिन अंदर ही अंदर संघर्ष की तैयारी भी पूरी है।

क्या है 10% आबादी भूखंड का पूरा मामला?

आपको बता दें कि यह विवाद नया नहीं, बल्कि वर्षों पुराना है। जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को मुआवजा दिया गया, साथ ही वादा किया गया कि 10% आबादी भूखंड दिया जाएगा। लेकिन बड़ी संख्या में किसानों को अब तक इसका लाभ नहीं मिला।

2011 का समझौता बना आज की लड़ाई की नींव

गौरतलब है कि 21 अक्टूबर 2011 को गजराज-पतवारी प्रकरण में एक बड़ा समझौता हुआ कि 64.7% मुआवजा और 6% पर 10% भूखंड दिये जाएं। इसके बाद आदेश भी जारी हुए, लेकिन जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाया।

2023 की बोर्ड बैठक, फिर भी समाधान अधूरा

दिसंबर 2023 में Greater Noida Authority की 133वीं बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास हुआ। 10% अतिरिक्त आबादी भूखंड देने का मुद्दा फिर उठा। लेकिन किसानों का आरोप है कि फाइलों में फैसले हुए, जमीन पर नहीं।

किसानों का आरोप: “हक छिना जा रहा है”

विदित है कि महापंचायत में किसानों ने साफ कहा कि जिन किसानों ने कोर्ट नहीं गए, उनके लिए भी प्राधिकरण को फैसला करना था लेकिन अब तक स्पष्ट नीति लागू नहीं हुई। कई जगह अधिग्रहण रद्द होने के उदाहरण भी हैं। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

आंदोलन का अगला चरण क्या होगा?

सूत्रों के अनुसार सीएम से मुलाकात के बाद भी समाधान नहीं निकला तो बड़ा धरना-प्रदर्शन तय दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

प्राधिकरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती

एक तरफ विकास परियोजनाएं, इंडस्ट्रियल हब, निवेश दूसरी तरफ जमीन देने वाले किसानों के अधिकार; यहीं पर टकराव सबसे ज्यादा गहरा हो रहा है।

ग्रेटर नोएडा में 10% आबादी भूखंड का मुद्दा अब सिर्फ जमीन का नहीं रहा यह अधिकार बनाम विकास और किसान बनाम सिस्टम का मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन पश्चिमी यूपी की राजनीति और प्रशासन दोनों को प्रभावित कर सकता है। सबकी नजर अब इस पर है कि सीएम स्तर की बातचीत से समाधान निकलता है या यह संघर्ष और बड़ा रूप लेता है।

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