लखनऊ में खुला देश का पहला 10-D थिएटर!: फिल्म देखते ही हिलेंगी सीटें, चेहरे पर पड़ेगी पानी की बौछार और चलेगी हवा, जानिए स्वदेशी तकनीक से तैयार यह थिएटर में क्यों हैं इतना खास_एक नजर
लखनऊ में खुला देश का पहला 10-D थिएटर!

लखनऊ: अब रोमांचक फिल्म का मजा लेने के लिए केवल बड़ी स्क्रीन और शानदार आवाज काफी नहीं होगी। कल्पना कीजिए कि आप फिल्म में जंगल के बीच से गुजर रहे हैं, अचानक हवा का तेज झोंका महसूस होता है, सीट हिलने लगती है और बारिश के दृश्य के दौरान पानी की बौछार भी पड़ती है। ऐसा ही अनोखा अनुभव अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मिल सकेगा। अलीगंज स्थित आंचलिक विज्ञान नगरी यानी रीजनल साइंस सिटी में स्वदेशी तकनीक से विकसित 10-D थिएटर शुरू किया गया है।

एक बार में 25 लोग देख सकेंगे शो

आपको बता दें कि मंगलवार, 13 अक्टूबर को उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने इसका उद्घाटन किया। आयोजकों और अधिकारियों के मुताबिक, इसे देश का पहला स्वदेशी 10-D थिएटर बताया जा रहा है। करीब 50 लाख रुपये की लागत से तैयार इस थिएटर में एक साथ 25 लोग बैठकर शो देख सकते हैं। यहां दर्शकों को फिल्म के दृश्यों के साथ अलग-अलग विशेष प्रभावों का अनुभव भी कराया जाएगा।

फिल्म देखते समय हिलेंगी सीटें, हवा और पानी का भी होगा एहसास

गौरतलब है कि इस थिएटर में सामान्य फिल्म देखने और 10-D शो का अनुभव अलग होगा। स्क्रीन पर तेज रफ्तार वाहन या रोमांचक घटनाएं दिखाई देने पर सीटों में कंपन और गति का अनुभव हो सकता है। हवा के झोंके, पानी की बौछार, कोहरे और गर्मी-ठंडक जैसे विशेष प्रभाव दर्शकों को कहानी के और करीब ले जाने के लिए तैयार किए गए हैं। यहां ‘जर्नी टू द सेंटर ऑफ द अर्थ’ जैसी फिल्म के माध्यम से दर्शक पृथ्वी की आंतरिक संरचना और भूगर्भीय दुनिया के बारे में रोचक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। क्रस्ट, मेंटल और कोर जैसे विषयों को दृश्य और विशेष प्रभावों के जरिए समझाने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य मनोरंजन के साथ विज्ञान को सरल और दिलचस्प बनाना है।

दिल्ली और लखनऊ की टीम ने तैयार की स्वदेशी तकनीक

विदित है कि इस थिएटर को विकसित करने में राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली और आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ की तकनीकी टीमों ने संयुक्त रूप से काम किया। अधिकारियों के अनुसार, इसके डिजाइन, कंट्रोल सिस्टम और वीडियो तकनीक सहित कई महत्वपूर्ण हिस्सों को देश में ही विकसित किया गया है। इसका मकसद ऐसी तकनीक तैयार करना है, जिसे कम लागत में देश के दूसरे शहरों तक भी पहुंचाया जा सके। केंद्र प्रमुख शतदल घोष के मुताबिक, पहले इस तरह की तकनीक के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे लागत और रखरखाव की परेशानी बढ़ती थी। अब स्वदेशी तकनीक विकसित होने से दूसरे विज्ञान केंद्रों में भी इसे शुरू करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

बच्चों ने बताया; जैसे सचमुच उसी दुनिया में पहुंच गए

पहला शो देखने पहुंचे विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। कुछ बच्चों ने बताया कि पानी की बौछार और सीटों की हलचल ने शो को बेहद रोमांचक बना दिया। वहीं, पृथ्वी की आंतरिक संरचना और उल्कापिंडों से जुड़ी जानकारी ने उनकी जिज्ञासा बढ़ाई। विद्यार्थियों के मुताबिक, ऐसा लगा जैसे वे स्क्रीन पर दिखाई जा रही जगह पर वास्तव में मौजूद हों। शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने भी इस पहल को विज्ञान और नवाचार से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने स्कूलों से अपील की कि बच्चों को विज्ञान केंद्रों में लाया जाए, ताकि वे किताबों में पढ़ी बातों को देखकर और अनुभव करके समझ सकें।

अब दूसरे शहरों में भी शुरू करने की तैयारी

गौरतलब है कि अधिकारियों के मुताबिक, अगले चरण में दिल्ली, कोलकाता, कुरुक्षेत्र और गुवाहाटी में भी इस तरह के थिएटर शुरू करने की योजना है। हालांकि, इन शहरों में शुरुआत की तारीखों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

लखनऊ का यह नया आकर्षण मनोरंजन के साथ विज्ञान सीखने का अवसर भी दे सकता है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यहां विद्यार्थियों और आम दर्शकों की कितनी भागीदारी रहती है और स्वदेशी 10-D तकनीक दूसरे शहरों तक कितनी तेजी से पहुंचती है।

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