IIT खड़गपुर में बनेगा देश का पहला फिजिकल AI स्कूल!: रोबोटिक्स, डिजिटल ट्विन और स्मार्ट मशीनों से होगी पढ़ाई, जानें आखिर क्या होता हैं फिजिकल AI और कौन ले सकेंगे इसमें दाखिला?
IIT खड़गपुर में बनेगा देश का पहला फिजिकल AI स्कूल!

नई दिल्ली/खड़गपुर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल सवालों के जवाब देने, तस्वीरें बनाने या कंप्यूटर पर काम करने तक सीमित नहीं रहने वाला है। आने वाले समय में ऐसी तकनीक विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जो वास्तविक दुनिया को समझ सके, परिस्थितियों का आकलन कर सके और जरूरत के अनुसार खुद निर्णय लेकर काम कर सके। इसी दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर ने देश का पहला समर्पित फिजिकल AI स्कूल स्थापित करने की पहल की है। इस स्कूल का नाम संस्थान के पूर्व छात्र विनोद गुप्ता के दिवंगत बेटे की स्मृति में 'बेंजामिन गुप्ता स्कूल ऑफ फिजिकल AI' रखा जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 35 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए विनोद गुप्ता का परिवार 12.5 करोड़ रुपये और एक अन्य पूर्व छात्र 10 करोड़ रुपये का योगदान देगा। शेष राशि संस्थान की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी। इस संबंध में विनोद गुप्ता और IIT खड़गपुर फाउंडेशन अमेरिका के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

आखिर क्या होता है फिजिकल AI?

आपको बता दें कि अभी तक सामान्य AI का इस्तेमाल मुख्य रूप से डिजिटल दुनिया में जानकारी जुटाने, डेटा का विश्लेषण करने और सवालों के जवाब देने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन फिजिकल AI इससे एक कदम आगे की तकनीक है। इसके माध्यम से ऐसे रोबोट और स्मार्ट सिस्टम विकसित करने पर काम होगा, जो अपने आसपास के वातावरण को सेंसर की मदद से समझ सकें, परिस्थितियों का अनुमान लगा सकें और उसके अनुसार कार्रवाई कर सकें। उदाहरण के तौर पर ऐसे रोबोट जो फैक्टरी में काम करें, मशीनों की खराबी पहचानें या मुश्किल परिस्थितियों में खुद रास्ता तय कर सकें।

रोबोटिक्स से लेकर डिजिटल ट्विन तक होगी पढ़ाई

प्रस्तावित स्कूल में कई आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों पर शोध और पढ़ाई की जाएगी। इनमें फिजिक्स आधारित मशीन लर्निंग, साइंटिफिक AI, इंटेलिजेंट रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम, डिजिटल ट्विन्स, एडवांस्ड सेंसिंग और AI आधारित प्रयोग शामिल हैं। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो केवल तेज काम न करे, बल्कि उसके फैसले भरोसेमंद और समझने योग्य भी हों। खासकर चिकित्सा, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में इसका महत्व बढ़ सकता है, जहां छोटी-सी तकनीकी गलती भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।

अगले शैक्षणिक सत्र से शुरू हो सकते हैं कार्यक्रम

गौरतलब है कि संस्थान की योजना के अनुसार, स्कूल में हाइब्रिड मोड में मास्टर डिग्री कार्यक्रम, प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन और विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं। इंजीनियरिंग, भौतिक विज्ञान, जीवन विज्ञान और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थी, शोधकर्ता तथा कामकाजी पेशेवर इससे लाभ उठा सकेंगे। हालांकि, शैक्षणिक कार्यक्रमों की शुरुआत के लिए अभी आवश्यक मंजूरी लंबित है।

देश के दूसरे संस्थान भी AI पर बढ़ा रहे हैं फोकस

IIT खड़गपुर की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब देश के कई बड़े शिक्षण संस्थान AI को पढ़ाई और शोध से जोड़ रहे हैं। IISER पुणे ने विद्यार्थियों के लिए AI उपयोग से संबंधित नीति अपनाई है। वहीं IIM अहमदाबाद और IIM बेंगलुरु में भी पढ़ाई, केस स्टडी और विश्लेषण के लिए AI आधारित प्रयोग किए जा रहे हैं।

IIT खड़गपुर का प्रस्तावित फिजिकल AI स्कूल भारत में AI शिक्षा और शोध को वास्तविक दुनिया की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकता है। आने वाले समय में इसी तकनीक के जरिए रोबोटिक्स, चिकित्सा, उद्योग और वैज्ञानिक अनुसंधान में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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