क्या हैं हाईवे और एक्सप्रेसवे में अंतर, जानकर हो जाएंगे आप भी हैरान!: सिर्फ नाम ही नहीं, सफर के ये नियम भी होते हैं पूरी तरह से अलग, स्पीड और एंट्री-एग्जिट के नियमों समेत...
क्या हैं हाईवे और एक्सप्रेसवे में अंतर, जानकर हो जाएंगे आप भी हैरान!

नई दिल्ली: देश में तेजी से हाईवे और एक्सप्रेस-वे का जाल बिछ रहा है। हर साल नई सड़क परियोजनाएं शुरू हो रही हैं और करोड़ों लोग इन रास्तों से सफर कर रहे हैं। लेकिन आज भी बड़ी संख्या में लोग हाईवे और एक्सप्रेस-वे को एक ही समझते हैं। जबकि दोनों के निर्माण, नियम, स्पीड लिमिट, एंट्री सिस्टम और उद्देश्य में बड़ा अंतर होता है। यदि आप भी अक्सर इन सड़कों पर यात्रा करते हैं, तो यह अंतर जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।

हाईवे और एक्सप्रेस-वे में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेशनल हाईवे ऐसी सड़कें होती हैं, जो शहरों, कस्बों और गांवों को आपस में जोड़ती हैं। इन पर कई स्थानों से वाहन सड़क पर चढ़ या उतर सकते हैं। रास्ते में स्थानीय सड़कें, चौराहे और कई जगह ट्रैफिक भी मिलता है। वहीं एक्सप्रेस-वे पूरी तरह कंट्रोल्ड एक्सेस रोड होते हैं। यानी यहां वाहन केवल निर्धारित एंट्री और एग्जिट पॉइंट से ही प्रवेश या बाहर निकल सकते हैं। बीच रास्ते कहीं से भी सड़क पर चढ़ने या उतरने की अनुमति नहीं होती।

लेन और सड़क की बनावट में भी बड़ा फर्क

गौरतलब है कि अधिकांश नेशनल हाईवे 2 से 4 लेन वाले होते हैं, हालांकि कई प्रमुख हाईवे इससे अधिक लेन के भी हैं। दूसरी ओर एक्सप्रेस-वे आमतौर पर 6 से 8 लेन या उससे अधिक चौड़े बनाए जाते हैं। इनका निर्माण आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से किया जाता है ताकि वाहन तेज गति से भी सुरक्षित यात्रा कर सकें।

स्पीड लिमिट क्यों होती है अलग?

हाईवे पर स्थानीय वाहन, ट्रैक्टर, दोपहिया, पैदल यात्री और कई तरह का ट्रैफिक देखने को मिलता है। इसलिए यहां गति सीमा अपेक्षाकृत कम रखी जाती है। इसके विपरीत एक्सप्रेस-वे पर स्थानीय ट्रैफिक नहीं होता और रास्ते में बार-बार रुकना भी नहीं पड़ता। इसी वजह से यहां वाहनों को अधिक गति से चलाने की अनुमति दी जाती है, हालांकि निर्धारित स्पीड लिमिट का पालन करना अनिवार्य होता है।

दोनों का उद्देश्य भी अलग-अलग

विदित है कि नेशनल हाईवे का मुख्य उद्देश्य गांवों, कस्बों और शहरों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना और लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही आसान बनाना है। वहीं एक्सप्रेस-वे का निर्माण मुख्य रूप से दो बड़े शहरों या प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों के बीच यात्रा का समय कम करने के लिए किया जाता है, ताकि लंबी दूरी कम समय में तय की जा सके।

भारत में कितने हाईवे और एक्सप्रेस-वे हैं?

देश में वर्तमान समय में सैकड़ों नेशनल हाईवे और दर्जनों एक्सप्रेस-वे परिचालन में हैं। देश का सबसे लंबा नेशनल हाईवे NH-44 है, जो श्रीनगर से कन्याकुमारी तक जाता है और उत्तर से दक्षिण भारत को जोड़ता है। दूसरी ओर दिल्ली-मुंबई, पूर्वांचल, गंगा, यमुना और दिल्ली-मेरठ जैसे एक्सप्रेस-वे देश की तेज रफ्तार सड़क परियोजनाओं के प्रमुख उदाहरण हैं।

यात्रा से पहले यह अंतर जानना क्यों जरूरी है?

विशेषज्ञों का मानना है कि हाईवे और एक्सप्रेस-वे के नियम अलग-अलग होने के कारण वाहन चालकों को इनकी जानकारी जरूर होनी चाहिए। सही नियमों का पालन करने से न केवल यात्रा सुरक्षित होती है, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी काफी कम हो जाती है। तेजी से विकसित हो रहे सड़क नेटवर्क के बीच यह जानकारी हर चालक के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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