नई दिल्ली: देश में इन दिनों E20 पेट्रोल चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। कुछ वाहन चालकों का दावा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ियों की माइलेज प्रभावित हुई है, जबकि सरकार और तेल विपणन कंपनियों का कहना है कि माइलेज में बदलाव को सीधे E20 पेट्रोल से जोड़ना सही नहीं है। इसी बीच सवाल उठ रहा है कि क्या भारत ही ऐसा देश है जहां पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जा रहा है? जवाब है—नहीं। दुनिया के कई देश वर्षों से अलग-अलग स्तर पर इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग कर रहे हैं।
क्या होता है E20 पेट्रोल?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि E20 का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल मिला होता है। इथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ने से विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी, प्रदूषण कम होगा और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
भारत में कहां तक पहुंची इथेनॉल ब्लेंडिंग?
गौरतलब है कि भारत में फिलहाल E20 पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इथेनॉल मिश्रण को और बढ़ाना है। इसके लिए देशभर में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर भी काम किया जा रहा है।
ब्राजील दुनिया में सबसे आगे
यदि इथेनॉल मिश्रण की बात करें तो ब्राजील इस क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश माना जाता है। वहां सामान्य पेट्रोल में लगभग 30 प्रतिशत इथेनॉल (E30) मिलाया जाता है। इतना ही नहीं, वहां बड़ी संख्या में ऐसे वाहन भी हैं जो 100 प्रतिशत इथेनॉल (E100) पर चल सकते हैं।
अमेरिका में भी वर्षों से हो रहा इस्तेमाल
विदित है कि अमेरिका में सबसे अधिक E10 पेट्रोल का उपयोग किया जाता है। कई राज्यों में E15 भी उपलब्ध है। वहां लंबे समय से इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग किया जा रहा है और इसे ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
यूरोप, कनाडा और नेपाल भी इस दिशा में आगे
यूरोप के कई देशों में E10 पेट्रोल आम हो चुका है। वहीं कनाडा के अलग-अलग प्रांतों में E5 से E12 तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल किया जाता है। भारत का पड़ोसी नेपाल भी पहले ही E10 पेट्रोल अपना चुका है और वहां भी इसे नियमित रूप से उपयोग किया जा रहा है।
जापान ने तय किया भविष्य का रोडमैप
जापान फिलहाल इथेनॉल मिश्रण के मामले में भारत और ब्राजील से पीछे है, लेकिन उसने भी स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं। जापान 2030 तक E10 और 2040 तक E20 पेट्रोल लागू करने की दिशा में काम कर रहा है।
सरकारें क्यों बढ़ा रही हैं इथेनॉल ब्लेंडिंग?
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अपनाने के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे पहला उद्देश्य विदेशी कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च को कम करना है। इसके अलावा इससे कार्बन उत्सर्जन घटाने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और गन्ना, मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ाकर किसानों को अतिरिक्त आय दिलाने की भी उम्मीद की जाती है। इसी वजह से दुनिया के कई देश अपनी ऊर्जा नीति में इथेनॉल मिश्रण को लगातार बढ़ा रहे हैं।
माइलेज को लेकर क्यों हो रही है चर्चा?
हाल के दिनों में कुछ वाहन मालिकों और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स ने दावा किया है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ियों की माइलेज कम हुई है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि माइलेज कई अन्य कारणों जैसे वाहन की स्थिति, इंजन की तकनीक, ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति और रखरखाव पर भी निर्भर करता है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तकनीकी जांच और वैज्ञानिक तथ्यों को ध्यान में रखना जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत इथेनॉल मिश्रण को और बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। यदि उत्पादन, वाहन तकनीक और ईंधन आपूर्ति प्रणाली समान गति से विकसित होती रही, तो इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ किसानों और पर्यावरण दोनों को लाभ मिल सकता है।