ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लाखों लोगों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत भरी खबर सामने आई है। नोएडा से ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर को पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है। अब इस प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। अगर कैबिनेट से भी मंजूरी मिल जाती है तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का रास्ता खुल जाएगा और क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन की बड़ी समस्या दूर होने की उम्मीद है।
7.5 किलोमीटर का होगा नया मेट्रो रूट
आपको बता दें कि प्रस्तावित डीपीआर के मुताबिक नोएडा से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बीच करीब 7.5 किलोमीटर लंबा मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाना है। इस रूट पर कुल 5 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इसमें नोएडा सेक्टर-61 को इंटरचेंज स्टेशन के तौर पर विकसित करने की योजना है। इसके बाद मेट्रो सेक्टर-70, सेक्टर-122, सेक्टर-123 और ग्रेटर नोएडा सेक्टर-4 यानी किसान चौक के आसपास पहुंचेगी। इस कॉरिडोर के तैयार होने पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के कई बड़े रिहायशी इलाकों को नोएडा के मौजूदा मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।
100 से ज्यादा हाईराइज सोसाइटियों को मिलेगा फायदा
गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आबादी बढ़ी है। सेक्टर-1, 2, 3, 4, टेकजोन-4, सेक्टर-16, 16बी, 16सी, सेक्टर-10 और 12 समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में हाईराइज सोसाइटियां विकसित हो चुकी हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक पब्लिक ट्रांसपोर्ट और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की कमी है। रोजाना नोएडा, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में नौकरी या कारोबार के लिए जाने वाले लोगों को सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। मेट्रो कॉरिडोर बनने के बाद इन यात्रियों को सीधा और अपेक्षाकृत सुविधाजनक विकल्प मिल सकता है।
करीब एक दशक से चल रही है मेट्रो की मांग
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो की मांग कोई नई नहीं है। करीब एक दशक पहले नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-5 तक मेट्रो विस्तार की योजना सामने आई थी। इस दौरान ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बड़ी संख्या में नई सोसाइटियां और आबादी बस गई, लेकिन मेट्रो परियोजना का इंतजार खत्म नहीं हुआ। यही वजह है कि क्षेत्र के निवासी लंबे समय से मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर मांग करते रहे हैं।
अब अगली नजर केंद्रीय कैबिनेट पर
विदित है कि एनएमआरसी की बोर्ड बैठक में इस परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक PIB की मंजूरी के बाद अब परियोजना से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। यानी PIB की मंजूरी के बाद अब सबसे बड़ा पड़ाव केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
मेट्रो आई तो बदल जाएगी कनेक्टिविटी की तस्वीर
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो आने से सिर्फ आवागमन आसान होने की उम्मीद नहीं है, बल्कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। रोजाना सड़क पर निर्भर रहने वाले हजारों यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन मिल सकता है।
फिलहाल लोगों की नजर केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी पर टिकी है। अगर वहां से भी प्रस्ताव पास होता है तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासियों के लिए करीब एक दशक से चला आ रहा मेट्रो का इंतजार आखिरकार खत्म होने की दिशा में बढ़ जाएगा।