₹2000 से ज्यादा की UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने की तैयारी!: संसद में पेश हुआ बिल, वहीं 95% ट्रांजैक्शन पर...जानिए किसे देनी पड़ सकती हैं फीस और आम ग्राहकों पर क्या होगा इसका असर_एक नज़र
₹2000 से ज्यादा की UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने की तैयारी!

नई दिल्ली: देश में करोड़ों लोग रोजाना UPI के जरिए भुगतान करते हैं। ऐसे में डिजिटल पेमेंट को लेकर एक बड़ा बदलाव भविष्य में देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने संसद में 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026' पेश किया है। इस प्रस्तावित बदलाव के बाद सरकार को भविष्य में UPI समेत कुछ डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, फिलहाल UPI पर कोई चार्ज लागू नहीं हुआ है और सरकार ने इसे लागू करने की तारीख या अंतिम फैसला भी घोषित नहीं किया है।

क्या है पूरा मामला?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए विधेयक में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। अभी तक कानून के तहत UPI और कुछ अन्य डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर MDR लगाने की अनुमति नहीं थी। प्रस्तावित संशोधन के बाद सरकार जरूरत पड़ने पर अधिसूचना जारी कर MDR लागू कर सकेगी।

₹2000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर लग सकता है MDR

सरकारी स्तर पर जिन प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है, उनमें ₹2000 से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर लगभग 0.25% से 0.40% तक MDR लगाने का विकल्प शामिल है। हालांकि, यह केवल एक प्रस्ताव है और अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

आम ग्राहकों पर लगेगा चार्ज या नहीं?

गौरतलब है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले सामान्य UPI ट्रांसफर (Person to Person) पर किसी भी तरह का शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यदि भविष्य में MDR लागू होता है तो यह मुख्य रूप से व्यापारियों (Merchant Payments) पर लागू होगा, न कि आम ग्राहकों के व्यक्तिगत UPI भुगतान पर।

किन लोगों पर पड़ सकता है असर?

यदि सरकार MDR लागू करती है तो इसका असर मुख्य रूप से दुकानदारों, बड़े व्यापारियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है। कई रिपोर्टों के अनुसार, सालाना अधिक कारोबार करने वाले बड़े व्यापारियों पर पहले चरण में यह व्यवस्था लागू की जा सकती है। छोटे दुकानदारों और कम मूल्य के लेन-देन को राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

MDR क्या होता है?

विदित है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है, जो किसी डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने पर व्यापारी बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को देता है। अभी क्रेडिट और डेबिट कार्ड भुगतान पर MDR लागू है, जबकि UPI लेन-देन पर यह शुल्क नहीं लिया जाता।

95% ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ सकता असर

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यदि भविष्य में MDR लागू भी किया जाता है तो करीब 95% UPI ट्रांजैक्शन इससे प्रभावित नहीं होंगे। ₹2000 से कम राशि वाले अधिकांश भुगतान, जैसे किराना, दूध, सब्जी, ऑटो, टैक्सी और रोजमर्रा की खरीदारी पर पहले जैसी व्यवस्था जारी रहने की संभावना है।

सरकार क्यों कर रही है बदलाव?

डिजिटल पेमेंट कंपनियों और बैंकिंग क्षेत्र का कहना है कि बिना MDR के UPI सेवाओं का संचालन, सर्वर क्षमता बढ़ाने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और नई तकनीक में निवेश करना लगातार महंगा होता जा रहा है। इसी वजह से लंबे समय से बड़े व्यापारिक लेन-देन पर सीमित MDR लागू करने की मांग की जा रही थी। सरकार अब इसी दिशा में कानूनी ढांचा तैयार कर रही है।

फिलहाल क्या रहेगी व्यवस्था?

गौरतलब है कि अभी UPI पूरी तरह मुफ्त है और किसी भी प्रकार का नया शुल्क लागू नहीं किया गया है। संसद में पेश किया गया यह विधेयक केवल सरकार को भविष्य में MDR लागू करने का अधिकार देने से जुड़ा है। अंतिम फैसला, शुल्क की दर, लागू होने की तारीख और किन लेन-देन पर यह लागू होगा, इसका निर्णय सरकार बाद में अलग अधिसूचना जारी करके करेगी।

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