लखनऊ/नई दिल्ली : प्रदेश में देश की पहली डिजिटल जनगणना की तैयारी चालू हो गयी है। देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद जनगणना अब पूरी तरह बदलने जा रही है। इस बार कोई मोटी रजिस्टर-फाइल नहीं बल्कि मोबाइल ऐप, लाइव डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए घर-घर जानकारी जुटाई जाएगी। उत्तर प्रदेश में इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और लाखों कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। सरकार साफ कह रही है कि यह सिर्फ गिनती नहीं, आने वाले 10-15 साल की योजनाओं की नींव है। यानी आपने सही जानकारी दी तो सड़क, पानी, स्कूल, अस्पताल सब तय होगा। गलत दी तो नुकसान भी आपको ही होगा।
पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना :
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि 2027 की जनगणना दो चरणों में होगी:
●पहला चरण: मकान और सुविधाओं का रिकॉर्ड
●दूसरा चरण: जनसंख्या और सामाजिक जानकारी
करीब 30 से 35 लाख कर्मचारी मोबाइल ऐप से डेटा भरेंगे और रियल-टाइम में सरकार तक पहुंचेगा। खास बात यह है कि आप चाहें तो पहले खुद भी ऑनलाइन जानकारी भर सकेंगे (Self-Enumeration)।
आखिर पूछेंगे क्या ; 33 सवाल क्यों अहम? :
जनगणना में इन 33 सवालों
के जवाब देने होंगे -
भवन नंबर (नगर या
स्थानीय प्राधिकारी
अथवा जनगणना
नंबर)
मकान का नंबर
मकान के फर्श में प्रमुख
सामग्री
मकान के दीवार में
प्रयुक्त प्रमुख सामग्री
मकान के छत में प्रयुक्त
प्रमुख सामग्री
मकान के उपयोग
मकान की हालत
परिवार क्रमांक
परिवार के सदस्यों की
संख्या कितनी है?
परिवार के मुखिया का
नाम क्या है?
परिवार के मुखिया का
लिंग
अनुसूचित जाति /
अनुसूचित जनजाति/
अन्य
मकान के स्वामित्व की
स्थिति
मकान में कमरों की
संख्या
पेयजल का मुख्य स्रोत
पेयजल स्रोत की
उपलब्धता
लाइट का मुख्य स्रोत
शौचालय की उपलब्धता
शौचालय का प्रकार
गंदे पानी की निकासी
स्नानघर की उपलब्धता
रसोईघर, एलपीजी /
पीएनजी कनेक्शन
खाना पकाने के लिए
मुख्य ईंधन
रेडियो / ट्रांजिस्टर
टेलीविजन
इंटरनेट सुविधा
लैपटॉप/कम्प्यूटर
टेलीफोन / मोबाइल
फोन / स्मार्ट फोन
साइकिल / स्कूटर /
मोटरसाइकिल / मोपेड
कार / जीप / वैन
परिवार में विवाहित
दंपतियों की संख्या
मुख्य अनाज
मोबाइल नंबर
मोबाइल नंबर क्यों मांगा जाएगा?
विदित है कि बहुत लोगों को डर रहता कि कहीं टैक्स जांच न हो जाए? इसका स्पष्ट जवाब है नहीं मोबाइल नंबर सिर्फ रिकॉर्ड सत्यापन, डुप्लीकेट हटाने, सरकारी योजनाओं की सही पहचान के लिए होगा।
गलत जानकारी दी तो क्या होगा?
आपको बता दें कि कई लोग सोचते हैं कम लोग बताएंगे तो ज्यादा राशन मिलेगा लेकिन सच उल्टा है। गलत जानकारी देने से निम्नलिखित नुकसान होंगे:
●राशन, आवास, पेंशन रुक सकती है
●सरकारी रिकॉर्ड में आपका अस्तित्व नहीं माना जाएगा
●भविष्य की योजनाओं से बाहर हो सकते हैं
●कानून के अनुसार गलत सूचना पर जुर्माना भी संभव है।
सरकार को इससे क्या फायदा?
गौरतलब है कि यही डेटा तय करेगा कि कहाँ सड़क बनेगी, कहाँ स्कूल खुलेगा, किस गांव में अस्पताल चाहिए, किस इलाके में पानी की कमी है और किस वर्ग को ज्यादा मदद की जरूरत है। यहां तक कि चुनाव क्षेत्र और सरकारी बजट भी इसी पर तय होता है।
यूपी में तैयारियां तेज :
गौरतलब है कि प्रदेश में पहले चरण में 27 जिलों के मास्टर ट्रेनर्स को ट्रेनिंग दी जा रही है। ये आगे लाखों कर्मचारियों को सिखाएंगे ताकि कोई भी घर छूट न जाए।
क्यों जरूरी है आपका सहयोग?
विदित है कि आज देश की कई योजनाएं अभी भी 2011 के आंकड़ों पर चल रही हैं। कोरोना के कारण 2021 की जनगणना टल गई थी इसलिए नई गणना बेहद अहम है।
सही जानकारी आपके इलाके का विकास कर सकती है वहीं गलत जानकारी आपकी सुविधा बंद कर सकती है।
14 साल बाद हो रही जनगणना देश के विकास की दिशा तय करेगी। 33 सवालों के जवाब सिर्फ सरकार के लिए नहीं, बल्कि आपके अपने इलाके के विकास के लिए भी जरूरी हैं। मोबाइल नंबर से लेकर खाने के अनाज तक, हर जानकारी भविष्य की योजनाओं की बुनियाद बनेगी। इसलिए जब जनगणना कर्मी आपके दरवाजे पर आएं, तो सहयोग करें, सही जानकारी दें और अपने इलाके के विकास में भागीदार बनें।