नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले चौंकाने वाले वीडियो, नेताओं के कथित बयान और चेहरों से मिलती-जुलती नकली क्लिप्स अब बेधड़क नहीं फैल पाएंगी। केंद्र सरकार ने डिजिटल दुनिया के लिए बड़ा नियम लागू कर दिया है। अब 20 फरवरी से हर AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बने कंटेंट पर पहचान का लेबल लगाना अनिवार्य होगा और अगर कोई डीपफेक वीडियो-फोटो सामने आती है तो उसे 3 घंटे के भीतर हटाना पड़ेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने IT Rules-2021 में बदलाव कर यह आदेश जारी किया है। उद्देश्य साफ है इंटरनेट को फेक वीडियो से दूर बनाना।
क्या बदलेगा आपके मोबाइल स्क्रीन पर?
आपको बता दें कि नए नियम के अनुसार अब जब आप कोई वीडियो, फोटो या ऑडियो देखेंगे तो आपको साफ-साफ पता चलेगा कि वह असली है या AI से बना हुआ। हर AI कंटेंट की पहचान होगी। वीडियो/फोटो पर AI Generated बड़ा लेबल लगा रहेगा। स्क्रीन का कम से कम 10% हिस्सा चेतावनी कवर करेगा। ऑडियो में शुरुआत में चेतावनी सुनाई देगी। साथ ही हर कंटेंट में स्थायी डिजिटल पहचान (मेटाडेटा) जरूरी होगी। इस पहचान को हटाया नहीं जा सकेगा यानि अब कोई भी एडिटेड भाषण या नकली इंटरव्यू “सच्चाई” बनकर वायरल नहीं हो सकेगा।
डीपफेक दिखा तो 3 घंटे का अल्टीमेटम :
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि शिकायत मिलते ही 3 घंटे के भीतर डीपफेक हटाना जरूरी है।अगर देरी हुई तो जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म की मानी जाएगी। इसका सीधा असर बदनामी फैलाने वाले वीडियो, ब्लैकमेलिंग क्लिप्स, चुनावी अफवाहों और सेलिब्रिटी और आम लोगों के नकली वीडियो पर पड़ेगा।
नए नियमों के 3 बड़े हथियार :
लेबल हटाना मना
एक बार AI टैग लग गया तो कोई नहीं मिटा सकेगा।
ऑटोमैटिक रोकथाम
अश्लील, धोखाधड़ी या भ्रामक AI कंटेंट अपलोड होने से पहले ही ब्लॉक होगा।
हर 3 महीने चेतावनी
यूजर्स को बताया जाएगा कि गलत इस्तेमाल किया तो सजा या जुर्माना तय।
इसका असर किस पर पड़ेगा?
सरकार के नए नियमों का असर आम यूजर्स पर पड़ेगा। फेक खबर पकड़ना आसान होगा। गलत जानकारी कम होंगे। पहचान चोरी से सुरक्षा मिलेगी।
कंटेंट क्रिएटर्स
●वीडियो डालने से पहले खुलासा जरूरी
●एडिटेड कंटेंट छिपा नहीं सकेंगे
सोशल मीडिया कंपनियां
●नई टेक्नोलॉजी लगानी पड़ेगी
●निगरानी बढ़ेगी
●खर्च भी बढ़ेगा
सरकार क्यों लाई ये सख्ती?
सरकार के मुताबिक जनरेटिव AI के कारण नकली बयान, पहचान की चोरी, चुनावी हेरफेर और डिजिटल ठगी तेजी से बढ़ रहे थे। नए नियम का मकसद भरोसेमंद इंटरनेट बनाना है।
क्या होता है डीपफेक?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डीपफेक वह वीडियो या ऑडियो है जिसमें AI किसी व्यक्ति का चेहरा या आवाज बदल देता है। ऐसा लगता है मानो वही व्यक्ति बोल रहा हो, जबकि उसने कुछ कहा ही नहीं।
यह फैसला इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब इंटरनेट पर “सच्चाई की पहचान” कानूनी रूप से लागू की जा रही है। अब स्क्रीन पर हकीकत या AI की बनाई कहानी दिखेगी। डिजिटल दुनिया में आजादी बनी रहेगी, लेकिन जिम्मेदारी के साथ। अब वो दिन गए जब कोई भी फेक वीडियो बनाकर लाखों लोगों को बेवकूफ बना सकता था। सरकार ने साफ कर दिया है कि असली को असली, नकली को नकली रहना होगा। यूजर्स को अब हर AI कंटेंट पर 'असली-नकली' का पता चलता रहेगा।