जयपुर : राजस्थान में कैब सेवा से जुड़ा खेल अब पूरी तरह बदल गया है। राजस्थान सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए राज्य में एग्रीगेटर पॉलिसी लागू कर दी है। इसके बाद ओला-उबर जैसी कैब कंपनियां अब मनमाने किराए नहीं वसूल सकेंगी। किराया सरकार तय करेगी और सबसे अहम बात यह है कि यात्रा किराए का 80% हिस्सा सीधे वाहन मालिक/ड्राइवर को मिलेगा।
परिवहन विभाग ने गजट नोटिफिकेशन किया जारी :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परिवहन विभाग ने ड्राफ्ट पर सुझाव लेने के बाद गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। संयुक्त शासन सचिव व अतिरिक्त आयुक्त परिवहन ओपी बुनकर के हस्ताक्षर के साथ लागू इस नीति ने यात्रियों की सुरक्षा और ड्राइवरों की सामाजिक सुरक्षा; दोनों को केंद्र में रखा है।
क्या-क्या बदला? सीधे शब्दों में समझिए
गौरतलब है कि नए नियम के अनुसार :
●अब सरकार तय करेगी किराया
●कैब कंपनियां अपनी मर्जी से रेट नहीं बढ़ा सकेंगी।
●तय सरकारी दरों का पालन अनिवार्य होगा।
ड्राइवर को मिलेगा अब कुल का 80% भुगतान :
आपको बता दें कि अब कुल किराए का 80% वाहन मालिक/ड्राइवर को मिलेगा। कंपनियों की कटौती पर भी लगाम लगाई जा सकेगी।
राइड कैंसिलेशन पर पेनल्टी :
विदित है कि ड्राइवर या यात्री बिना वैध कारण कैंसल करेगा तो 10% जुर्माना, और अधिकतम ₹100 लगेगा।
महिला और यात्री सुरक्षा पर सबसे बड़ा फोकस :
गौरतलब है कि नए नियम में महिला और यात्री सुरक्षा पर ज्यादा फोकस किया गया है। 24×7 कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर अनिवार्य किया गया है। ऐप में लाइव लोकेशन शेयर और पैनिक बटन की सुविधा दी गयी है। महिला यात्रियों को महिला ड्राइवर चुनने का विकल्प दिया जाएगा। रूट से भटके वाहन की सूचना सीधे कंट्रोल रूम को दी जाएगी, साथ ही हर राइड का डेटा 3 से 24 महीने सुरक्षित रखना होगा।
लाइसेंस, फीस और सख्ती :
विदित है कि नए नियम में लाइसेंस पर फीस और सख्ती भी लागू की गई है। एग्रीगेटर को 5 साल का लाइसेंस के साथ ₹10,000 आवेदन शुल्क, ₹5 लाख तक लाइसेंस फीस लगाया गया है। वाहन संख्या के हिसाब से ₹10 से 50 लाख सुरक्षा जमा होगा।।साथ ही नियम तोड़े तो 3 महीने सस्पेंशन, बार-बार उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा।
ड्राइवरों के लिए नए कड़े मानक
40 घंटे की ट्रेनिंग अनिवार्य
पिछले 3 साल में आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए
आई-चेक, मेडिकल, मानसिक फिटनेस टेस्ट जरूरी
हर साल रिफ्रेशर ट्रेनिंग
बीमा कवरेज में पहली बार इतनी सख्ती :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ड्राइवर का स्वास्थ्य बीमा ₹5 लाख, दुर्घटना बीमा ₹10 लाख, हर यात्री का बीमा ₹5 लाख करने के साथ ही टैक्सी में फर्स्ट एड किट और फायर एक्सटिंग्विशर अनिवार्य किया गया है।
राजस्थान में ऑफिस खोलना जरूरी :
नए नियम के तहत हर एग्रीगेटर को राज्य में कार्यालय खोलना होगा, साथ ही ग्रिवेंस ऑफिसर नियुक्त करना अनिवार्य होगा। एवं ऐप हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम में उपलब्ध रहेगा।
सरकार का साफ संदेश
यह नीति सिर्फ कैब कंपनियों को कंट्रोल करने के लिए नहीं, बल्कि ड्राइवरों को सम्मान, यात्रियों को सुरक्षा और सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए है। गिग वर्कर्स को स्थिर आय, यात्रियों को भरोसा और सरकार को निगरानी; तीनों एक साथ लागू हो रहें हैं।
राजस्थान ने देश को रास्ता दिखा दिया है, अब कैब की कमाई का बड़ा हिस्सा ड्राइवर के पास, किराया सरकार के नियंत्रण में और सुरक्षा सर्वोपरि रहेगा।