चिप्स, बर्गर और कोल्ड ड्रिंक पर सख्ती की तैयारी!: सरकार जंक फ़ूड पर लगाएगी 'हेल्थ टैक्स', स्कूल कैंटीन में बिक्री पर भी लगेगी रोक, वहीं भ्रामक विज्ञापनों पर...जानिये चेतावनी लेबल लागू करने समेत होने वाले बड़े बदलाव?
चिप्स, बर्गर और कोल्ड ड्रिंक पर सख्ती की तैयारी!

नई दिल्ली: अगर आप या आपके बच्चे चिप्स, बर्गर, पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक और पैक्ड स्नैक्स खाने के शौकीन हैं, तो आने वाले समय में इन्हें खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। बच्चों में तेजी से बढ़ रहे मोटापे, डायबिटीज और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और उसके राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) ने जंक फूड पर विशेष 'हेल्थ टैक्स' लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही विज्ञापनों, पैकेजिंग और स्कूलों में बिकने वाले अनहेल्दी खाद्य पदार्थों को लेकर भी कई बड़े बदलाव सुझाए गए हैं।

बच्चों में बढ़ता मोटापा बना चिंता का कारण

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बच्चों में मोटापा और डायबिटीज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की गई है, ताकि बच्चों को कम उम्र से ही स्वस्थ खान-पान की आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

जंक फूड पर लग सकता है हेल्थ टैक्स

गौरतलब है कि प्रस्ताव के अनुसार अधिक शुगर, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थों तथा मीठे पेय पदार्थों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य ऐसे उत्पादों की खपत कम करना और लोगों को अधिक पौष्टिक एवं स्वस्थ विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

भ्रामक विज्ञापनों पर भी होगी सख्ती

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि बच्चों को आकर्षित करने वाले कार्टून कैरेक्टर, सेलिब्रिटी प्रचार और ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाने पर विचार किया जाए, जिनमें अनहेल्दी खाद्य पदार्थों को स्वास्थ्यवर्धक बताकर पेश किया जाता है। इससे उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सकेगी।

हर पैकेट पर दिखेगी साफ चेतावनी

विदित है कि पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के सामने वाले हिस्से पर बड़े और स्पष्ट अक्षरों में यह बताना अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है कि उत्पाद में कितनी शुगर, नमक और फैट मौजूद है। इसका उद्देश्य यह है कि ग्राहक खरीदने से पहले कुछ ही सेकंड में उत्पाद की पोषण संबंधी जानकारी समझ सकें।

स्कूल कैंटीन में जंक फूड पर लग सकती है रोक

प्रस्ताव के अनुसार स्कूलों और उनके आसपास जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने की सिफारिश की गई है। साथ ही स्कूल कैंटीन का नियमित हेल्थ ऑडिट कराने और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा

बच्चों और अभिभावकों को स्वस्थ खान-पान के प्रति जागरूक करने के लिए कॉमिक बुक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री तैयार करने का सुझाव दिया गया है। इन माध्यमों से बच्चों को आसान और रोचक तरीके से बताया जाएगा कि ज्यादा नमक, चीनी और फैट वाले खाद्य पदार्थ शरीर पर किस तरह असर डालते हैं।

फूड कंपनियों पर भी पड़ सकता है असर

यदि भविष्य में इन प्रस्तावों को लागू किया जाता है, तो खाद्य और पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों को अपनी पैकेजिंग, मार्केटिंग रणनीति, उत्पादों की गुणवत्ता और कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है। साथ ही उपभोक्ताओं को भी खाद्य पदार्थ चुनते समय अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

अभी सिर्फ प्रस्ताव, अंतिम फैसला बाकी

महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल हेल्थ टैक्स लगाने का सुझाव दिया गया है, इसे अभी लागू नहीं किया गया है। इस प्रस्ताव पर सरकार और संबंधित एजेंसियों द्वारा विचार किए जाने के बाद ही किसी अंतिम नीति या नियम का फैसला होगा।

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