जमीन-मकान खरीदने से पहले जान लें नोटरी और रजिस्ट्री का बड़ा अंतर!: जानें कोर्ट में किस दस्तावेज की होती है ज्यादा कानूनी मान्यता, एक गलती से फंस सकती है आपकी मेहनत की कमाई
जमीन-मकान खरीदने से पहले जान लें नोटरी और रजिस्ट्री का बड़ा अंतर!

राजस्व: जमीन या मकान खरीदना ज्यादातर लोगों के जीवन का बड़ा आर्थिक फैसला होता है। कोई अपनी जिंदगी भर की कमाई से प्लॉट खरीदता है, तो कोई परिवार के लिए घर बनवाने का सपना देखता है। लेकिन प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन में एक छोटी-सी कानूनी चूक भी भविष्य में बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है। खासकर तब, जब लोग नोटरी और रजिस्ट्री को एक जैसा समझकर केवल नोटरी के कागज के आधार पर जमीन या मकान खरीद लेते हैं। दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य अलग है और इनकी कानूनी भूमिका भी अलग-अलग होती है। ऐसे में किसी भी संपत्ति का सौदा करने से पहले यह समझना जरूरी है कि नोटरी क्या प्रमाणित करती है और रजिस्ट्री किस काम आती है।

क्या होती है नोटरी और इसका इस्तेमाल कहां होता है?

आपको बता दें कि नोटरी एक अधिकृत नोटरी पब्लिक द्वारा की जाने वाली कानूनी प्रक्रिया है। इसमें दस्तावेज पर हस्ताक्षर, संबंधित व्यक्ति की पहचान या दस्तावेज से जुड़ी कुछ औपचारिकताओं का प्रमाणीकरण किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल हलफनामा, घोषणा-पत्र, सहमति-पत्र और अन्य दस्तावेजों में किया जाता है। कई मामलों में किरायानामे या समझौते पर नोटरी भी कराई जाती है। हालांकि, केवल नोटरी की मुहर लग जाने से हर दस्तावेज अपने आप वैध नहीं हो जाता। दस्तावेज का उद्देश्य और उस पर लागू कानूनी नियम भी मायने रखते हैं।

रजिस्ट्री क्या है और प्रॉपर्टी में क्यों जरूरी है?

गौरतलब है कि रजिस्ट्री में दस्तावेज को संबंधित सरकारी पंजीकरण कार्यालय में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत दर्ज कराया जाता है। जमीन या मकान की बिक्री के मामले में लागू कानून के अनुसार पंजीकृत विक्रय विलेख यानी सेल डीड संपत्ति के स्वामित्व हस्तांतरण का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। पंजीकरण अधिनियम, 1908 और संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 के प्रावधानों के अनुसार, अचल संपत्ति के कई प्रकार के हस्तांतरण के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। इसलिए केवल नोटरी कराकर जमीन खरीद लेना, जहां पंजीकृत विक्रय विलेख जरूरी हो, मालिकाना हक पाने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह भी ध्यान रखें कि रजिस्ट्री होने मात्र से हर विवाद खत्म नहीं हो जाता। संपत्ति के पुराने रिकॉर्ड, विक्रेता का वास्तविक अधिकार, बकाया या अन्य कानूनी अड़चनें भी जांचना जरूरी है।

नोटरी और रजिस्ट्री में क्या है बड़ा अंतर?

नोटरी का मुख्य काम दस्तावेज और हस्ताक्षर से जुड़ी निर्धारित औपचारिकताओं का प्रमाणीकरण करना है। वहीं, रजिस्ट्री संबंधित दस्तावेज को सरकारी पंजीकरण रिकॉर्ड में दर्ज करने की प्रक्रिया है। दोनों की कानूनी भूमिका अलग है, इसलिए इन्हें एक-दूसरे का विकल्प नहीं समझना चाहिए। खर्च और समय में भी अंतर हो सकता है। नोटरी की फीस और दस्तावेज का खर्च आमतौर पर कम होता है, जबकि संपत्ति की रजिस्ट्री में लागू स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क देना पड़ सकता है। वास्तविक खर्च दस्तावेज के प्रकार, संपत्ति के मूल्य और संबंधित राज्य के नियमों पर निर्भर करता है।

कोर्ट में किसकी मान्यता ज्यादा होती है?

विदित है कि इस सवाल का जवाब दस्तावेज के प्रकार और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। नोटरी किया हुआ दस्तावेज भी किसी विवाद में प्रासंगिक साक्ष्य हो सकता है, लेकिन वह अपने आप संपत्ति के मालिकाना हक का प्रमाण नहीं बन जाता। यदि जमीन या मकान की बिक्री के लिए कानून के तहत पंजीकृत विक्रय विलेख जरूरी है, तो केवल नोटरी वाला समझौता उसकी जगह नहीं ले सकता। इसलिए संपत्ति खरीदने से पहले दस्तावेजों की कानूनी जांच कराना और आवश्यक पंजीकरण पूरा करना बेहद जरूरी है।

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

जमीन या मकान का सौदा करने से पहले विक्रेता के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, जमीन का रिकॉर्ड, लागू पंजीकरण नियम और किसी संभावित विवाद की जांच कराएं। केवल नोटरी पेपर, रसीद या कब्जे के आधार पर बड़ी रकम देने से बचें।

याद रखें कि नोटरी और रजिस्ट्री एक ही चीज नहीं हैं। सही दस्तावेज और उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाना आपकी मेहनत की कमाई और संपत्ति से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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