मुंबई/मनोरंजन/धर्म: भारतीय पौराणिक कथाओं को बड़े पर्दे पर भव्य रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की घोषणा की गई है। टीवी पर 'रामायण' जैसी कालजयी प्रस्तुति देने वाले महान निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके पोते आकाश सागर चोपड़ा और अमृत सागर चोपड़ा ने अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म श्रृंखला 'श्रीमद्भागवतम्' का ऐलान कर दिया है। यह परियोजना सात अलग-अलग फिल्मों में बनाई जाएगी और इसे भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े पौराणिक प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। गौरतलब है कि इस मेगा प्रोजेक्ट की घोषणा गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर की गई। निर्माताओं का उद्देश्य भारत के प्राचीन आध्यात्मिक ग्रंथों को आधुनिक तकनीक, भव्य दृश्य प्रभाव और विश्वस्तरीय सिनेमाई प्रस्तुति के साथ दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाना है।
क्या होगी 'श्रीमद्भागवतम्' की खासियत?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह फिल्म श्रृंखला महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित भागवत महापुराण पर आधारित होगी। इस ग्रंथ में लगभग 18 हजार श्लोक और 12 स्कंध हैं, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी शिक्षाओं, भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों तथा भक्ति, धर्म, कर्तव्य और मोक्ष जैसे विषयों का विस्तृत वर्णन मिलता है। निर्माताओं का कहना है कि इस विशाल कथा को पहली बार इतने बड़े स्तर पर सात फिल्मों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
रामायण और महाभारत से भी अधिक व्यापक कहानी
आकाश सागर चोपड़ा ने कहा कि श्रीमद्भागवतम भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है। इसकी दार्शनिक गहराई और कथाओं का विस्तार इतना विशाल है कि इसे एक ही फिल्म में समेटना संभव नहीं था। इसलिए इसे सात भागों में प्रस्तुत करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि हर फिल्म की अपनी अलग दृश्य शैली होगी, जिससे दर्शकों को प्रत्येक अध्याय का अलग और अनूठा अनुभव मिलेगा।
क्या-क्या देखने को मिलेगा?
फिल्म श्रृंखला में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, गोकुल और वृंदावन की बाल लीलाओं से लेकर उनके युवावस्था के महत्वपूर्ण प्रसंगों को बड़े पैमाने पर दिखाया जाएगा। इसके अलावा दर्शकों को पहली बार बड़े पर्दे पर रासलीला और गोपी गीत का विस्तृत और भव्य प्रस्तुतीकरण देखने को मिलेगा। फिल्म में भगवान विष्णु के मत्स्य, वराह और नरसिंह जैसे अवतारों के साथ-साथ समुद्र मंथन, सूर्यवंश और चंद्रवंश की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण पौराणिक घटनाओं को भी आधुनिक तकनीक के माध्यम से जीवंत किया जाएगा। ध्रुव, भरत, पृथु और कपिल जैसे महान भक्तों और अवतारों की कम चर्चित लेकिन प्रेरणादायक कथाओं को भी इस श्रृंखला में स्थान दिया जाएगा।
रामोजी फिल्म सिटी में शुरू हुई शूटिंग
विदित है कि इस मेगा प्रोजेक्ट के पहले भाग की शूटिंग हैदराबाद स्थित प्रसिद्ध रामोजी फिल्म सिटी में शुरू हो चुकी है। इसका औपचारिक शुभारंभ तेलंगाना के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में किया गया। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वरूप देने के लिए हॉलीवुड से जुड़े विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है। सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी जोएल शेफर संभाल रहे हैं, जबकि कई अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं से जुड़े विजुअल इफेक्ट्स विशेषज्ञ क्लाइड एडवर्ड्स इस प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं।
अनुभवी टीम करेगी मार्गदर्शन
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आध्यात्मिक दृष्टि से प्रामाणिक बनाए रखने के लिए पद्म भूषण से सम्मानित आध्यात्मिक गुरु श्री एम शोध मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, वर्ष 1987 में प्रसारित ऐतिहासिक टीवी धारावाहिक 'रामायण' के सह-निर्देशक मोती सागर इस पूरे प्रोजेक्ट के मेंटर हैं।
रामानंद सागर की विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश
रामानंद सागर ने 'रामायण', 'श्री कृष्ण', 'लव कुश' और कई अन्य धार्मिक धारावाहिकों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं को घर-घर तक पहुंचाया था। अब उनके परिवार की नई पीढ़ी उसी विरासत को आधुनिक तकनीक, बड़े बजट और वैश्विक स्तर की प्रस्तुति के साथ सिनेमाघरों तक ले जाने की तैयारी कर रही है।
कब आएगी पहली फिल्म?
फिलहाल निर्माताओं ने केवल परियोजना और शीर्षक की आधिकारिक घोषणा की है। आने वाले महीनों में पहले भाग की रिलीज, कलाकारों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का खुलासा किया जाएगा। पौराणिक फिल्मों में रुचि रखने वाले दर्शकों के बीच इस घोषणा के बाद उत्सुकता काफी बढ़ गई है। यदि यह परियोजना अपने घोषित स्वरूप में पूरी होती है, तो यह भारतीय पौराणिक सिनेमा के इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्म श्रृंखलाओं में शामिल हो सकती है।