धर्म और संस्कृति: भारत में पितरों का सम्मान सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पारिवारिक मूल्यों, भावनाओं और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा विषय माना जाता है। घर में अगर पूर्वजों की तस्वीरें मौजूद हों, तो उन्हें किस दिशा में लगाया जाए, यह सवाल अक्सर लोगों को उलझाता है।
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, पितरों की तस्वीर गलत दिशा में लगाने से घर का ऊर्जा-संतुलन प्रभावित होता है, जबकि सही दिशा में लगाने से घर में सुख-शांति, समृद्धि, मानसिक स्थिरता और पारिवारिक एकता बढ़ती है।
इसी विषय पर जागरण और अन्य वास्तु विशेषज्ञों द्वारा दी गई मान्यताओं के आधार पर हम लेकर आए हैं यह विस्तृत रिपोर्ट, जिसमें वो सब कुछ है जो कोई भी जानना चाहेगा।
क्यों महत्वपूर्ण है पितरों की दिशा?
वास्तु शास्त्र में हर दिशा को एक ऊर्जा-केन्द्र (Energy Centre) माना गया है।
जैसे:
पूर्व दिशा- ज्ञान और स्वास्थ्य
उत्तर दिशा- धन व प्रगति
पश्चिम- भावनाएँ
दक्षिण- पितरों का स्थान
इसीलिए पितरों की तस्वीर गलत दिशा में लगाने से घर के ऊर्जा-क्षेत्र में असंतुलन आ सकता है।
सबसे शुभ दिशा: दक्षिण दिशा, जिसे “पितृ दिशा” कहा गया
वास्तु शास्त्र के अनुसार पितरों की वास्तविक दिशा दक्षिण मानी गई है।
इसके कारण:
दक्षिण दिशा यम और पितृ लोक की दिशा मानी गई है, हिन्दू धर्म में श्राद्ध, पितृ तर्पण और पितृ कार्य इसी दिशा में किए जाते हैं, दक्षिण दिशा स्थिरता, स्मृति, परंपरा और परिवार की जड़ों से जुड़ी मानी जाती है, यही कारण है कि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पितरों की तस्वीरें
•पुरानी पारिवारिक फोटो अल्बम
•स्मृति-चिन्ह
•पितरों से जुड़े पूजन सामग्री
सब दक्षिण दीवार पर रखने चाहिए।
किन दिशाओं में पितरों की तस्वीर बिल्कुल नहीं लगानी चाहिए?
1. उत्तर दिशा, धन और करियर पर नकारात्मक असर
•यह कुबेर की दिशा है।
•यहाँ पितरों की तस्वीर लगाने से धन-संबंधी रुकावटें,
•बार-बार खर्च और आर्थिक अस्थिरता तक हो सकती है।
2. पूर्व दिशा, स्वास्थ्य और मानसिक शांति में बाधा
सूर्य और ज्ञान की दिशा।
यहां पितरों की तस्वीर रखने से:
•मानसिक शांति प्रभावित
•बच्चों के पढ़ाई पर असर
•परिवारिक तनाव बढ़ सकता है
3. पश्चिम दिशा, भावनात्मक अस्थिरता
पश्चिम जल-तत्त्व और भावनात्मक ऊर्जा की दिशा है।
यहां पितरों की तस्वीर रखने से घर में छीना-झपटी, विवाद, हल्के झगड़े बढ़ सकते हैं।
4. ईशान कोण (Northeast) धार्मिक दिशा
•यह दिशा देवताओं की मानी जाती है।
•यहां पितरों की तस्वीर लगाना शास्त्रों में वर्जित है।
तस्वीर कैसी होनी चाहिए?
•बैठे हुए आसन की तस्वीर होना सबसे शुभ
•चेहरे स्पष्ट दिखें
•मुस्कुराते या शांत भाव वाली फोटो ही लगाएँ
•खड़े हुए पोज़ या आक्रामक भाव वाली फोटो बिल्कुल नहीं
•फोटो न बहुत बड़ी हो, न बहुत छोटी
•फोटो टूटे फ्रेम या पीलापन लिए न हो
कहाँ-कहाँ तस्वीरें बिल्कुल न लगाएँ?
•बेडरूम
•रसोई
•बाथरूम के पास
•बच्चों के कमरे में
•मंदिर में (देवताओं और पितरों की जगह अलग होती है)
•सीढ़ियों के नीचे
•किसी टूटी दीवार पर
वास्तु शास्त्र में इसे अनादर माना गया है।
तस्वीर के नीचे क्या रखना शुभ होता है?
वास्तु के अनुसार:
•तांबे का छोटा लोटा
•उसमें गंगाजल
•सफेद फूल
•या कच्चा चावल
इसे पितरों के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
तस्वीर के पास प्रकाश कब जलाना चाहिए?
आस्था के अनुसार तीन दिन शुभ माने गए हैं–
अमावस्या
पितृ पक्ष के दिन
हर शनिवार
इन दिनों दीया या अगरबत्ती जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है।
घर पर पितृ दोष हो तो क्या करें? (आस्था आधारित जानकारी)
अगर परिवार लगातार इन समस्याओं से जूझ रहा हो:
•काम में बाधा
•संतान में दिक्कत
•अचानक आर्थिक नुकसान
•मानसिक तनाव
•रिश्तों में कड़वाहट
तो यह पितृ दोष की ओर संकेत माना जाता है।
उपाय (मान्यताओं पर आधारित):
•दक्षिण दिशा में पितरों की तस्वीर सही स्थान पर लगाएँ
•रोज 1 मिनट मन ही मन पितरों को प्रणाम करें
•शनिवार को दीपक जलाएँ
•कौवों, कुत्तों, गायों को भोजन दें
क्या पितरों की तस्वीर ड्राइंग रूम में लगाना ठीक है?
हाँ, लेकिन:
•दक्षिण दिशा वाली दीवार ही चुनें
•फोटो को बहुत नीचे न लगाएँ
•ड्राइंग रूम में तस्वीरों का पूरा कोलाज रखा जा सकता है
•भावुक, दुःखभरी तस्वीरों से बचें
लोग अक्सर करते हैं ये गलतियाँ
•टूटी या छिली दीवार पर फोटो लगाना
•फोटो को खिड़की के बिल्कुल सामने लगाना
•एक साथ बहुत अलग-अलग पोज़ की तस्वीरें
•धूल जमा हुई फोटो
•तस्वीरों को लोहे की कील से टेढ़ा लगाना
•पितरों की तस्वीरों को बच्चों की फोटो से मिलाना
•तस्वीरों को पर्दे के पीछे आधा छिपाकर रखना
वास्तु में इसे ऊर्जा में रुकावट माना गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार…
वास्तुशास्त्री कहते हैं:
“पितरों की तस्वीर भौतिक सजावट से अधिक मानसिक ऊर्जा का स्रोत होती है। इसे सही दिशा में लगाने से घर की भावनात्मक समरसता और पारिवारिक एकता बढ़ती है।”
धार्मिक मान्यता क्या कहती है?
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार:
•पितरों का अपना लोक (पितृलोक) दक्षिण दिशा में माना गया है
•उनके प्रति सम्मान भाव रखने से पितर प्रसन्न होते हैं
•पितर प्रसन्न होंगे तो देवता भी प्रसन्न होते हैं
•घर में बरकत, संतति-सुख और धन-संपत्ति आती है
पूरी खबर का सार
•पितरों की तस्वीर दक्षिण दिशा में लगाएँ
•उत्तर, पूर्व, पश्चिम, ईशान कोण में न लगाएँ
•बेडरूम, किचन, बाथरूम के पास कभी नहीं
•तस्वीर बैठी मुद्रा में हो
•रोज साफ रखें
•अमावस्या/शनिवार को दीपक जलाने की मान्यता