जानें क्या हैं राजस्थान विधानसभा में पास हुआ विवादित डिस्टर्ब एरिया बिल!: कांग्रेस ने संविधान पर बताया हमला, अब इन इलाकों में बिना ADM/SDM अनुमति नहीं बिकेगी कोई सम्पत्ति? जानें क्या है पूरा मामला_एक नजर
जानें क्या हैं राजस्थान विधानसभा में पास हुआ विवादित डिस्टर्ब एरिया बिल!

जयपुर : राजस्थान विधानसभा में लंबी बहस और तीखी नोकझोंक के बाद ‘राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026’ को पारित कर दिया गया। इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में उन इलाकों में, जिन्हें प्रशासन ‘डिस्टर्ब एरिया’ घोषित करेगा, वहां बिना सरकारी अनुमति के प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री या रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी।

डिस्टर्ब एरिया घोषित होने पर क्या होंगे नियम

आपको बता दें कि बिल के प्रावधानों के अनुसार यदि किसी क्षेत्र में दंगे, सांप्रदायिक तनाव या जनसंख्या संतुलन बिगड़ने की आशंका हो, तो उस इलाके को डिस्टर्ब एरिया घोषित किया जा सकता है। एक बार किसी क्षेत्र को डिस्टर्ब एरिया घोषित कर दिया गया तो वहां:

• बिना ADM या SDM की अनुमति के प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री नहीं होगी

• बिना अनुमति की गई रजिस्ट्री अवैध और शून्य घोषित की जा सकेगी

• किरायेदार को निकालने के लिए भी प्रशासनिक अनुमति जरूरी होगी

• प्रशासन यह भी सुनिश्चित करेगा कि संपत्ति बाजार कीमत से कम में न बेची जाए और किसी दबाव में लेनदेन न हो।

तीन महीने में लेना होगा फैसला

गौरतलब है कि डिस्टर्ब एरिया में संपत्ति खरीदने या बेचने के लिए आवेदन करने के बाद ADM या SDM को तीन महीने के भीतर फैसला लेना होगा। जरूरत पड़ने पर इस समय सीमा को बढ़ाया भी जा सकता है। प्रशासन इस दौरान पूरी जांच करेगा कि प्रॉपर्टी ट्रांसफर में कोई दबाव, धोखाधड़ी या अवैध लेनदेन तो नहीं हो रहा।

कानून तोड़ने पर सख्त सजा

विदित है कि बिल में उल्लंघन के लिए कड़े प्रावधान भी रखे गए हैं। अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती माना जाएगा। दोषी को 3 से 5 साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ 1 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। हालांकि बैंकों या वित्तीय संस्थानों के पास गिरवी रखी संपत्ति की नीलामी पर यह कानून लागू नहीं होगा।

सरकार का दावा; कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए कानून

विदित है कि संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि कई जगहों पर साम्प्रदायिक तनाव के कारण लोग मजबूरी में अपनी संपत्ति बेचने पर मजबूर हो जाते हैं। उनके अनुसार यह कानून ऐसी स्थितियों में लोगों को सुरक्षा देने और जबरन पलायन रोकने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि अगर दंगे नहीं होंगे तो किसी क्षेत्र को डिस्टर्ब एरिया घोषित ही नहीं किया जाएगा।

विपक्ष का तीखा विरोध

कांग्रेस ने इस बिल का जोरदार विरोध किया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार इस कानून के जरिए धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि संपत्ति खरीदने-बेचने का अधिकार संविधान से मिला हुआ है और इस पर प्रशासनिक नियंत्रण भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकता है। डोटासरा ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में कांग्रेस सत्ता में आती है तो इस कानून को खत्म कर दिया जाएगा।

विधानसभा में गरमाया माहौल

आपको बता दें कि बिल पर चर्चा के दौरान विधानसभा में कई बार तीखी बहस हुई। विपक्ष ने इसे सामाजिक विभाजन बढ़ाने वाला कानून बताया, जबकि सरकार ने इसे सामाजिक स्थिरता और सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया। अंततः बहस के बाद यह बिल ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

गुजरात के बाद दूसरा राज्य

इस कानून के पारित होने के साथ ही राजस्थान, गुजरात के बाद ऐसा कानून लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून का असर राज्य में संपत्ति बाजार और संवेदनशील इलाकों की सामाजिक स्थिति पर आने वाले समय में साफ दिखाई दे सकता है।

सरकार का कहना है कि यह कानून साम्प्रदायिक तनाव या दंगा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को मजबूरी में संपत्ति बेचने से बचाने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए लाया गया है।

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