लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव चर्चा में है। बड़े भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी से हटाने के बाद मायावती ने अब अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को अहम जिम्मेदारी सौंपी है। इसे सिर्फ संगठन में बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले समय में युवाओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। मायावती ने ईशान को मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाकर उत्तर भारत के कई राज्यों की जिम्मेदारी दी है। उनकी भूमिका संगठन के कामकाज की समीक्षा करने और उसकी रिपोर्ट सीधे मायावती तक पहुंचाने की होगी। हालांकि, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की जिम्मेदारी मायावती ने अपने पास ही रखी है।
आकाश के बाद ईशान की एंट्री क्यों अहम?
आपको बता दें कि ईशान की सक्रिय राजनीति में एंट्री ऐसे समय हुई है, जब आकाश आनंद को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर लगातार चर्चा चल रही है। आकाश युवा चेहरे के तौर पर तेजी से उभरे थे और सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी मौजूदगी रही है। ऐसे में ईशान को आगे लाने के फैसले को बसपा की नई पीढ़ी की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी शायद युवाओं और खासकर जेन-जी वोटरों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए नए चेहरे को सामने लाना चाहती है।
कारोबार संभाल रहे थे ईशान
गौरतलब है कि राजनीति में सक्रिय होने से पहले ईशान आनंद अपने पिता आनंद कुमार के कारोबार से जुड़े हुए थे। उन्होंने अपने बड़े भाई आकाश की तरह लंदन में पढ़ाई की है। करीब 27 वर्षीय ईशान को मायावती ने पिछले साल अपने जन्मदिन के मौके पर सार्वजनिक रूप से सामने लाया था। इसके बाद से ही उनके राजनीति में आने की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है।
कई नेताओं को भी मिली नई जिम्मेदारी
ईशान के साथ बसपा संगठन में कई अन्य नेताओं का कद भी बढ़ाया गया है। पार्टी से बाहर किए गए रणधीर सिंह बेनीवाल की वापसी के बाद उन्हें फिर से सहारनपुर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी दी गई है। रामजी गौतम और लालाराम को भी अतिरिक्त राज्यों का प्रभार मिला है। वहीं विपुल कुमार को हरियाणा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे साफ है कि बसपा संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
आकाश समर्थकों में मायूसी
विदित है कि दूसरी ओर आकाश आनंद को लेकर पार्टी के भीतर असमंजस बना हुआ है। उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाए जाने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी की चर्चा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके समर्थन में ‘उम्मीदों का आकाश’ ट्रेंड भी हुआ। अब ईशान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने से आकाश की पार्टी में वापसी को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं। हालांकि, उनके राजनीतिक भविष्य पर अंतिम फैसला क्या होगा, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
10 सितंबर पर नजर
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि मायावती 9 सितंबर को दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर सकती हैं। इसके बाद 10 सितंबर को आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई बड़ा फैसला संभव है।
आकाश के बाद ईशान को आगे बढ़ाना बसपा के लिए सिर्फ पारिवारिक बदलाव नहीं, बल्कि संगठन और युवा राजनीति की नई दिशा का संकेत माना जा रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि ईशान बसपा को युवाओं के बीच कितना मजबूत कर पाते हैं और क्या मायावती की यह नई रणनीति उत्तर प्रदेश की सियासत में पार्टी को फिर से मजबूत स्थिति में ला पाएगी?