सपा और ‘कॉकरोच पार्टी’ की मुलाकात ने बढ़ाई यूपी में सियासी हलचल!: शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी, जानिए चुनाव नहीं लड़ेगी CJP, फिर अखिलेश से डेढ़ घंटे की बैठक के क्या हैं मायने?
सपा और ‘कॉकरोच पार्टी’ की मुलाकात ने बढ़ाई यूपी में सियासी हलचल!

लखनऊ : लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका की करीब डेढ़ घंटे की बंद कमरे में हुई मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। CJP भले ही फिलहाल विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की बात कह रही हो, लेकिन युवाओं के मुद्दों पर सक्रिय होने और यूपी में संगठन विस्तार की तैयारी ने इस मुलाकात को खास बना दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या CJP चुनावी मैदान में उतरे बिना सपा के लिए युवाओं के बीच माहौल बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है?

अखिलेश ने बुलाया था- CJP प्रवक्ता

आपको बता दें कि आशुतोष रांका के मुताबिक, दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन के दौरान सपा और अखिलेश यादव ने उनके मंच को समर्थन दिया था। इसी दौरान अखिलेश ने मिलने के लिए बुलाया, जिसके बाद वह लखनऊ पहुंचे। सपा की ओर से इस मुलाकात को धन्यवाद देने से जोड़कर बताया गया है। हालांकि, बैठक करीब डेढ़ घंटे चली, इसलिए राजनीतिक गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।

चुनाव नहीं लड़ेगी CJP, फिर यूपी में सक्रियता क्यों?

गौरतलब है कि CJP का कहना है कि वह फिलहाल चुनाव नहीं लड़ेगी और सक्रिय राजनीति में उतरने की उसकी योजना नहीं है। इसके बावजूद पार्टी यूपी में अपना संगठन मजबूत करने की तैयारी कर रही है। CJP के लिए यूपी इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां युवाओं की बड़ी आबादी है। पार्टी शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है।

**ये 5 मुद्दे बन सकते हैं हथियार-

CJP अगर यूपी में सक्रिय होती है तो उसके केंद्र में युवाओं से जुड़े ये मुद्दे रह सकते हैं—

• सरकारी भर्तियों में देरी और नियुक्तियां

• बेरोजगारी

• पेपर लीक

• प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी

• सरकारी स्कूल और शिक्षा व्यवस्था

यूपी में इन मुद्दों को लेकर अभ्यर्थी पहले भी कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं। ऐसे में CJP इन्हें बड़े अभियान का रूप देने की कोशिश कर सकती है।

सपा को क्या फायदा?

CJP की सबसे बड़ी ताकत फिलहाल सोशल मीडिया और युवाओं के बीच उसकी पहुंच मानी जा रही है। हालांकि, उसके पास किसी बड़े राजनीतिक दल जैसा जमीनी संगठन नहीं है। यही वजह है कि CJP से सपा को सीधे वोट ट्रांसफर की उम्मीद से ज्यादा युवाओं के बीच मुद्दा और नैरेटिव बनाने में फायदा हो सकता है। अगर भर्ती, रोजगार और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर CJP आंदोलन करती है, तो उसका राजनीतिक असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है।

विपक्षी नेताओं से पहले भी मुलाकात

गौरतलब है कि CJP के आंदोलन को अलग-अलग विपक्षी नेताओं का समर्थन मिल चुका है। आम आदमी पार्टी के नेताओं के अलावा तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना के उद्धव गुट, वाम दल और सपा से जुड़े कई नेताओं ने भी CJP नेताओं से मुलाकात की थी। हालांकि कांग्रेस के नेता इस आंदोलन से दूरी बनाए हुए दिखाई दिए हैं और CJP नेताओं की कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात की बात सामने नहीं आई है।

क्या भविष्य में बदलेगा रुख?

CJP फिलहाल चुनाव नहीं लड़ने की बात कह रही है। उसका दावा है कि उसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि राजनीति के काम करने के तरीके में बदलाव लाना है। फिर भी यूपी में संगठन विस्तार और युवाओं के मुद्दों पर सक्रियता को देखते हुए भविष्य की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि CJP सपा के साथ चुनावी गठबंधन करेगी या नहीं, यह तो साफ नहीं है, लेकिन अगर उसने यूपी के युवाओं के मुद्दों पर आंदोलन तेज कर दिया तो विधानसभा चुनाव से पहले वह सियासी बहस का रुख जरूर बदल सकती है।

अन्य खबरे