लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव आने वाला है। योगी आदित्यनाथ सरकार जल्द ही नई ट्रांसफर नीति लागू करने जा रही है, जिसके तहत हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले तय माने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बार तबादलों की प्रक्रिया को मई महीने में ही पूरा करने की योजना है, जिससे पूरे प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
कौन-कौन होंगे ट्रांसफर की जद में?
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि नई नीति के अनुसार जो कर्मचारी किसी जिले में 3 साल पूरे कर चुके हैं या एक ही मंडल में 7 साल से तैनात हैं, उनका ट्रांसफर लगभग तय माना जा रहा है। यह नियम समूह ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ के अधिकारियों पर लागू होगा।
कितने प्रतिशत कर्मचारियों का होगा तबादला?
गौरतलब है कि सरकार ने ट्रांसफर की सीमा भी तय कर दी है -
•समूह क और ख: अधिकतम 20% तक ट्रांसफर
•समूह ग और घ: अधिकतम 10% तक तबादले
इससे प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
इस बार क्या खास? इन कर्मचारियों को मिलेगी राहत
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि नई नीति में एक मानवीय पहल भी जोड़ी गई है जिसमें दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे कर्मचारियों को इलाज की सुविधा वाले स्थान के पास पोस्टिंग दी जा रही। सरकार का यह कदम संवेदनशील और सराहनीय माना जा रहा है।
क्यों जल्दी लाई जा रही है ट्रांसफर नीति?
इस बार नीति को जल्दी लागू करने की वजह भी खास है। आगामी जनगणना और पंचायत चुनाव के कारण प्रशासनिक तैयारियों को समय पर पूरा करना है। इसी कारण कार्मिक विभाग ने अप्रैल में ही तैयारी तेज कर दी है।
पिछली बार क्या हुआ था?
विदित है कि पिछले साल 2025 में 15 मई से ट्रांसफर शुरू हुए थे और 15 जून तक प्रक्रिया पूरी हुई। इस बार सरकार उससे भी पहले पूरा सिस्टम लागू करने की तैयारी में है।
यूपी में आने वाली यह ट्रांसफर नीति सिर्फ तबादलों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे को रीसेट करने वाला कदम साबित हो सकती है। यह तबादला नीति प्रशासन को ज्यादा प्रभावी बनाएगी।