यूपी में जमीन रजिस्ट्री से पहले, वास्तविक रकबा दर्ज करना अनिवार्य!: एक ही जमीन की डबल रजिस्ट्री और फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक, वहीं 70%...जानें बदलाव और फायदे_एक नज़र
यूपी में जमीन रजिस्ट्री से पहले, वास्तविक रकबा दर्ज करना अनिवार्य!

लखनऊ: जमीन खरीदने और बेचने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब भूमि की रजिस्ट्री कराने से पहले भूलेख पोर्टल पर जमीन का वास्तविक रकबा और उसकी पूरी स्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य भूमि संबंधी धोखाधड़ी, डबल रजिस्ट्री और वर्षों तक चलने वाले विवादों पर रोक लगाना है। इससे खरीदार और विक्रेता दोनों को रजिस्ट्री से पहले ही जमीन की सही जानकारी मिल सकेगी।

क्यों किया गया नियम में बदलाव?

आपको बता दें कि अब तक कई मामलों में देखा जाता था कि एक ही जमीन कई लोगों को बेच दी जाती थी। कई खरीदार रजिस्ट्री कराने के बाद भी जमीन पर कब्जा नहीं ले पाते थे और वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाते रहते थे। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि रजिस्ट्री के समय जमीन के वास्तविक रकबे और भूमि उपयोग की सही जानकारी उपलब्ध नहीं होती थी। कई बार खतौनी में दर्ज रकबा और मौके पर मौजूद रकबा अलग होने के बावजूद भी रजिस्ट्री हो जाती थी।

अब रजिस्ट्री से पहले क्या-क्या दर्ज करना होगा?

गौरतलब है कि नई व्यवस्था के तहत अब गाटा संख्या, ग्राम, तहसील और जिले के साथ यह भी दर्ज करना होगा कि संबंधित भूमि किसी विकास प्राधिकरण या विनियमित क्षेत्र में आती है या नहीं। यदि जमीन महायोजना में पार्क, हरित पट्टी, खुले स्थल, क्रीड़ा स्थल या प्रस्तावित सड़क के लिए आरक्षित है, तो उसका उल्लेख भी अभिलेख में करना अनिवार्य होगा।

खरीदारों को क्या होगा फायदा?

इस बदलाव के बाद खरीदार को रजिस्ट्री से पहले ही पता चल जाएगा कि जिस जमीन को वह खरीद रहा है, उसका भविष्य में अधिग्रहण होने की संभावना तो नहीं है। इससे बाद में होने वाले विवादों और आर्थिक नुकसान से बचा जा सकेगा।

अधिकारियों ने क्या कहा?

उपनिबंधक कार्यालय के वरिष्ठ सहायक ने बताया कि पहले वास्तविक रकबा दर्ज नहीं होने के कारण एक ही जमीन की कई बार रजिस्ट्री हो जाती थी। बाद में जानकारी सामने आने पर विवाद खड़ा हो जाता था। अब भूलेख पोर्टल पर वास्तविक रकबा दर्ज होने से जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आएगी और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि फरवरी से जून 2026 के बीच जिले में कुल 2,767 बैनामे हुए हैं और इस दौरान फर्जीवाड़े का कोई मामला सामने नहीं आया।

भूमि विवादों में आएगी बड़ी कमी

विदित है कि अधिवक्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन से जुड़े करीब 70 प्रतिशत मुकदमे कम हो सकते हैं। इससे आम लोगों की गाढ़ी कमाई सुरक्षित रहेगी, भू-माफियाओं पर लगाम लगेगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी।

विभाग का लक्ष्य है कि भविष्य में सभी भूमि रजिस्ट्रियां पूरी तरह पारदर्शी हों, ताकि किसी भी खरीदार या विक्रेता को बाद में धोखाधड़ी, डबल रजिस्ट्री या कानूनी विवाद का सामना न करना पड़े।

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