चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर योगी सरकार का बड़ा फैसला!: अगर 400 टन से ज्यादा स्टॉक...वहीं केंद्र ने पाकिस्तान से...जानें चीनी कीमतों को स्थिर रखने का सरकार का मेगाप्लान_एक नजर
चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर योगी सरकार का बड़ा फैसला!

लखनऊ/नई दिल्ली: त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में कहीं चीनी 65 रुपये तो कहीं 70 रुपये किलो तक बिकने की खबरों के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने कारोबारियों को तय सीमा से अधिक चीनी जमा करने से रोकने के निर्देश दिए हैं। वहीं, केंद्र सरकार ने बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का फैसला किया है। खास बात यह है कि भारत ने पाकिस्तान से चीनी खरीदने की संभावनाओं को भी खारिज कर दिया है।

400 टन से ज्यादा स्टॉक पर नजर

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चीनी की उपलब्धता और भंडारण की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कारोबारी जरूरत से ज्यादा समय तक चीनी का भंडारण न करें। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है। इससे अधिक स्टॉक रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और गंभीर मामलों में एस्मा के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है। सरकार का मकसद साफ है कि बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी पैदा करके कीमतें बढ़ाने वालों पर शिकंजा कसा जाए। प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध होने के बावजूद कीमतों में तेजी को देखते हुए स्टॉक की निगरानी बढ़ाई जा रही है।

48 रुपये से 65-70 रुपये किलो तक पहुंची चीनी

गौरतलब है कि चीनी की खुदरा कीमतों में पिछले एक महीने में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। करीब 48.18 रुपये किलो से बढ़कर कीमत कई बाजारों में 65 रुपये तक पहुंच गई है। कुछ स्थानों पर यह 70 रुपये प्रति किलो तक बिकने की बात सामने आई है। मेरठ और आसपास के बाजारों में भी अलग-अलग भाव दर्ज किए गए हैं। मेरठ में खुदरा कीमत करीब 64 रुपये, सहारनपुर में 65 रुपये, बिजनौर में 68 रुपये, शामली में 62 रुपये और मुजफ्फरनगर में करीब 65 रुपये प्रति किलो बताई गई है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में सरकार को आशंका है कि मांग बढ़ने के साथ चीनी की कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।

सरकार ने अपनाया तीन तरफा प्लान

कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार तीन स्तरों पर काम कर रही है। पहला, विदेश से चीनी का आयात कर बाजार में तत्काल सप्लाई बढ़ाई जा रही है। दूसरा, जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा और निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। तीसरा, नई फसल आने के बाद घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए गन्ने की पेराई जल्द शुरू करने की तैयारी है। एक सितंबर से थोक उपभोक्ताओं के लिए भी उनकी 15 दिन की खपत से अधिक चीनी रखने पर रोक का प्रावधान बताया गया है। वहीं, केंद्र और राज्य की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में स्टॉक का भौतिक सत्यापन करेंगी।

वैश्विक बाजार में भी चीनी की कमी

सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी चीनी की उपलब्धता को लेकर दबाव है। 2026-27 में दुनिया में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी का अनुमान सामने आया है। ऐसे माहौल में अंतरराष्ट्रीय बाजार से चीनी खरीदना भी आसान नहीं होगा। भारत ने घरेलू बाजार की जरूरत को देखते हुए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का रास्ता खोला है। सरकार का प्रयास है कि अक्टूबर में नई पेराई शुरू होने तक बाजार में पर्याप्त स्टॉक बना रहे।

पाकिस्तान की उम्मीदों को भारत ने दिया झटका

आपको बता दें कि भारत के आयात फैसले के बाद पाकिस्तान के चीनी उद्योग को उम्मीद थी कि वह भारतीय बाजार में चीनी बेच सकता है। पाकिस्तान ने करीब 1.05 लाख टन चीनी की बिक्री के लिए ग्लोबल टेंडर भी जारी किया। लेकिन भारत ने पाकिस्तान से चीनी खरीदने के बजाय दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आयात करने का विकल्प चुना है। भारतीय सूत्रों के मुताबिक, अगर देश को चीनी की जरूरत है तो वैश्विक बाजार में पर्याप्त विकल्प उपलब्ध हैं और पाकिस्तान से चीनी खरीदने की आवश्यकता नहीं है। पाकिस्तानी चीनी उद्योग के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि भारत जैसा विशाल और नजदीकी बाजार उसके लिए निर्यात का महत्वपूर्ण अवसर बन सकता था।

अगले डेढ़-दो महीने बेहद अहम

विदित है कि अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग बढ़ेगी। दूसरी ओर अक्टूबर में नई पेराई शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में अगले डेढ़-दो महीने चीनी बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।

सरकार की कोशिश है कि इस दौरान बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे, जमाखोरी पर रोक लगे और आम उपभोक्ता को बढ़ती कीमतों से राहत मिले। कुल मिलाकर, योगी सरकार की स्टॉक सीमा और केंद्र के आयात फैसले ने चीनी कारोबारियों के साथ-साथ पाकिस्तान के चीनी उद्योग को भी बड़ा संदेश दे दिया है।

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