लखनऊ : प्रदेश में मकान बनाने का सपना देखने वालों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब घर का नक्शा पास कराने के लिए महीनों तक फाइलें दौड़ाने, बार-बार आपत्तियों और अलग-अलग नियमों के चक्कर में पड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार ने भवन निर्माण से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया थी जिसे सरल बनाने का फैसला लिया है। आवास विभाग ने नई भवन विकास उपविधि के आधार पर सभी विकास प्राधिकरणों को आदेश जारी कर दिए हैं। अब पूरे प्रदेश में एक स्पष्ट और व्यवस्थित प्रणाली के तहत नक्शे पास किए जाएंगे।
क्या बदलेगा अब आम लोगों के लिए?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले स्थिति यह थी कि अलग-अलग नीतियों की अलग व्याख्या होती थी, हर प्राधिकरण अलग नियम बताता था जिससे बिल्डर और आम नागरिक दोनों भ्रम में रहते थे। कई बार फाइल महीनों अटकी रहती थी। अब नई व्यवस्था में इन समस्याओं को खत्म करने का दावा किया गया है। अब नक्शा पास करने का आधार मुख्य रूप से भवन विकास उपविधि होगा। जरूरत होने पर हाईटेक टाउनशिप और इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति का लाभ भी मिलेगा। जहां किसी नीति में ज्यादा अनुमति है, वही नियम लागू होगा। अधिकारियों की व्याख्या नहीं, लिखित मानक तय करेंगे फैसला होगा। यानी अब “किससे पूछें?” और “कौन सा नियम सही?” वाला भ्रम खत्म हो जाएगा।
किन शहरों ने मांगी थी स्पष्टता
गौरतलब है कि प्रदेश के कई बड़े विकास प्राधिकरण लंबे समय से सरकार से दिशा-निर्देश मांग रहे थे, जैसे गाजियाबाद, बुलंदशहर-खुर्जा, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन और लखनऊ। इन सभी जगहों पर बिल्डिंग नक्शा पास कराने में अलग-अलग नियमों की वजह से विवाद और देरी हो रही थी।
बिल्डरों को क्या फायदा?
विदित है कि नई व्यवस्था से बड़े प्रोजेक्ट्स को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। अब FAR (फ्लोर एरिया रेश्यो), बिल्डिंग की ऊंचाई, मिक्स्ड यूज (दुकान + मकान) और टाउनशिप सुविधाएं जैसे मामलों में स्पष्टता रहेगी। यदि किसी विशेष नीति में ज्यादा अनुमति है, तो वही लागू होगी यानी प्रोजेक्ट अटकेंगे नहीं।
आम आदमी को क्या लाभ मिलेगा?
●घर बनाने में देरी कम
●बार-बार आपत्ति कम
●रिश्वत/दलाली की गुंजाइश कम
●एक ही नियम पूरे प्रदेश में
●नक्शा पास कराने का समय घटेगा
सरकार का कहना है कि यह कदम निर्माण क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाएगा और निवेश भी बढ़ाएगा।
असल में क्यों जरूरी था बदलाव?
आपको बता दें कि अब तक सबसे बड़ी समस्या यही थी कि एक ही जमीन पर तीन-तीन नियम लागू हो जाते थे; उपविधि कुछ कहती, टाउनशिप नीति कुछ और, व प्राधिकरण की व्याख्या अलग रहती थी। अब तय कर दिया गया है कि जहां ज्यादा अनुमति, वही नियम मान्य होंगें।
क्या बदलेगा आगे?
विदित है कि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस कदम से हाउसिंग प्रोजेक्ट तेज होंगे, फ्लैट की लागत कम हो सकती है, रियल एस्टेट निवेश बढ़ेगा और लोगों को समय पर घर मिलेगा।
सब मिलाकर सरकार ने मकान निर्माण की सबसे बड़ी प्रशासनिक अड़चन पर सीधा वार किया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जमीनी स्तर पर भी यह व्यवस्था उतनी ही आसान साबित होती है या नहीं लेकिन फिलहाल घर बनाने वालों के लिए यह बड़ी राहत मानी जा रही है।