1536 करोड़ का आगरा-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, बदल देगा पश्चिमी यूपी की तस्वीर!: अलीगढ़ से आगरा मात्र 1 घंटे, वहीं उद्योग व निवेश को बढ़ावा के साथ साथ...जानें कब तक होगा तैयार और क्या रहेगा इसका रुट_एक नज़र
1536 करोड़ का आगरा-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, बदल देगा पश्चिमी यूपी की तस्वीर!

आगरा/अलीगढ़: उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने की तैयारी तेज हो गई है। ताला नगरी अलीगढ़ और ताज नगरी आगरा के बीच बनने वाला नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अब पश्चिमी यूपी के विकास की नई पहचान बनने जा रहा है। करीब 1536 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला यह हाईस्पीड कॉरिडोर न सिर्फ दो बड़े शहरों के बीच दूरी घटाएगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, मथुरा, बरेली और हाथरस समेत कई शहरों की तस्वीर बदल सकता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद अलीगढ़ से आगरा की यात्रा महज एक घंटे में पूरी हो सकेगी, जबकि अभी इस सफर में दो घंटे से अधिक का समय लगता है।

क्या है यह मेगा प्रोजेक्ट?

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि यह एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, यानी इसे पूरी तरह नए रूट पर विकसित किया जाएगा। पुराने हाईवे को चौड़ा करने के बजाय नई सड़क बनाई जाएगी, जिससे हाईस्पीड और बाधारहित यातायात संभव हो सकेगा। करीब 65 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को फिलहाल चार लेन में विकसित किया जाएगा, लेकिन भविष्य में इसे छह लेन तक विस्तार देने की व्यवस्था भी रखी गई है।

दो चरणों में होगा निर्माण

आपको बता दें कि परियोजना को दो हिस्सों में पूरा किया जाएगा।

पहला चरण

अलीगढ़ में नेशनल हाईवे-509 से शुरू होकर हाथरस के असरोई क्षेत्र तक लगभग 28 किलोमीटर लंबा मार्ग बनाया जाएगा।

दूसरा चरण

इसके बाद एक्सप्रेसवे हाथरस से आगे बढ़ते हुए आगरा के खंदौली क्षेत्र के पास सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा।

यानी अलीगढ़, हाथरस और आगरा के बीच सफर पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम हो जाएगा।

इन गांवों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे

आपको बता दें कि यह परियोजना मुख्य रूप से हाथरस जिले के 48 गांवों की लगभग 322 हेक्टेयर भूमि से होकर गुजरेगी। इसके अलावा लगभग 66 गांवों को सीधी सड़क कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 49 फुटओवर ब्रिज, अंडरपास और अन्य संरचनाएं भी बनाई जाएंगी ताकि स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो।

दिल्ली-नोएडा वालों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

गौरतलब है कि इस एक्सप्रेसवे का असर सिर्फ अलीगढ़ और आगरा तक सीमित नहीं रहेगा। आगरा में यह यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जबकि हाथरस के पास इसका संपर्क बरेली-मथुरा हाईवे से होगा। इसके चलते दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मथुरा, हाथरस, कासगंज, बदायूं, बरेली और आगरा के बीच कनेक्टिविटी पहले से कहीं बेहतर हो जाएगी। यात्रियों को शहरों के ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और लंबी दूरी का सफर कम समय में पूरा हो सकेगा।

जेवर एयरपोर्ट पहुंचना होगा आसान

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के संचालन से पहले यह एक्सप्रेसवे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई ताकत देगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों को एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए अब लंबा और जाम भरा रास्ता तय नहीं करना पड़ेगा। नई सड़क व्यवस्था से यात्रा समय में बड़ी कटौती होगी।

उद्योग और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक विकास का इंजन साबित हो सकता है।
इसके बनने से—

  • औद्योगिक निवेश बढ़ेगा
  • नए वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होंगे
  • रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा
  • पर्यटन उद्योग को नई रफ्तार मिलेगी
  • रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे

विशेष रूप से आगरा के पर्यटन और अलीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

कितना घट जाएगा सफर का समय?

अलीगढ़ से आगरा - पहले 2 से 2.5 घंटे अब लगभग 1 घंटा

नोएडा से अलीगढ़ - पहले 3 घंटे अब लगभग 2 घंटे

हाथरस से आगरा - काफी कम समय के साथ हाईस्पीड कनेक्टिविटी।

2027 तक पूरा होने की उम्मीद

आपको बता दें कि निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि सभी मंजूरियां और निर्माण प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती हैं तो वर्ष 2027 तक यह महत्वाकांक्षी परियोजना जनता को समर्पित की जा सकती है।

यमुना एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाओं के बाद अब आगरा-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास को नई दिशा देने जा रहा है। सड़क, उद्योग, निवेश, पर्यटन और रोजगार; हर क्षेत्र में इसका असर दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में यह एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं बल्कि पश्चिमी यूपी की आर्थिक रीढ़ साबित हो सकता है।

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