EMI नहीं भरी तो बैंक अब नहीं कर सकेगा मनमानी!: RBI ने रिकवरी नियमों में किए बड़े बदलाव, वहीं लोन लेते समय...जानिए अब बैंक आपके साथ क्या कर सकता हैं और क्या नहीं
EMI नहीं भरी तो बैंक अब नहीं कर सकेगा मनमानी!

वित्त/अर्थव्यवस्था: अगर आपने बैंक या फाइनेंस कंपनी से लोन लिया है और किसी वजह से EMI समय पर नहीं भर पा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। लोन की किस्त न चुकाने पर बैंक को रिकवरी का अधिकार जरूर है, लेकिन ग्राहक को डराने, परेशान करने या उसकी निजता में दखल देने की मनमानी अब नहीं चल सकेगी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन रिकवरी की प्रक्रिया को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य रिकवरी के दौरान ग्राहकों के अधिकारों और निजता की रक्षा करना है। नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होने हैं।

मोबाइल और निजी डेटा पर खास नजर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डिजिटल लोन और EMI पर मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने का चलन बढ़ने के साथ रिकवरी के नए तरीके भी सामने आए हैं। कुछ मामलों में डिवाइस को दूर से लॉक करने या उसकी सुविधाओं को सीमित करने जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता रहा है। नए नियमों के तहत रिकवरी के नाम पर ग्राहक के मोबाइल में मौजूद कॉन्टैक्ट, SMS, कॉल लॉग, फोटो या लोकेशन हिस्ट्री जैसे निजी डेटा का मनमाना इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। कुछ परिस्थितियों में डिवाइस से जुड़े तकनीकी प्रतिबंधों के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। आपातकालीन और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं को लेकर भी विशेष प्रावधान रखे गए हैं।

रिकवरी एजेंट की मनमानी पर लगेगी लगाम

EMI बकाया होने पर ग्राहकों को लगातार फोन करना, धमकाना या मानसिक दबाव बनाना लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। RBI के नए नियमों में रिकवरी प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। रिकवरी कॉल का रिकॉर्ड रखने और कॉल रिकॉर्ड करने जैसे प्रावधानों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि ग्राहक से किस तरीके से संपर्क किया गया। ग्राहक के परिवार, दोस्तों या अन्य लोगों से संपर्क करके उस पर दबाव बनाने की कोशिश पर भी नियमों के मुताबिक ही कार्रवाई करनी होगी।

कौन-कौन से लोन दायरे में आएंगे?

गौरतलब है कि ये नियम RBI के नियमन के दायरे में आने वाले बैंकों, NBFC और अन्य संबंधित वित्तीय संस्थानों द्वारा की जाने वाली लोन रिकवरी पर लागू होंगे। यानी होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन, गोल्ड लोन और अन्य तरह के कर्ज लेने वाले ग्राहकों के लिए रिकवरी प्रक्रिया में तय नियम महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि EMI न चुकाने पर बैंक अपना पैसा वापस नहीं मांग सकता।

EMI नहीं दी तो नुकसान फिर भी होगा

RBI के नए नियम कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी खत्म नहीं करते। अगर ग्राहक लगातार EMI नहीं भरता है तो उस पर लेट फीस या अन्य निर्धारित शुल्क लग सकते हैं और उसके क्रेडिट रिकॉर्ड पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। लगातार डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक नियमानुसार रिकवरी और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकता है। सिक्योर्ड लोन जैसे होम या कार लोन में गिरवी रखी संपत्ति पर भी तय कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई संभव है। वहीं पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड लोन में कोई विशेष संपत्ति गिरवी नहीं होती, इसलिए रिकवरी की प्रक्रिया अलग होती है।

ग्राहक क्या करे?

विदित है कि अगर आर्थिक परेशानी के कारण EMI भरना मुश्किल हो रहा है तो बैंक से बातचीत करना सबसे बेहतर रास्ता है। EMI को नजरअंदाज करने के बजाय उपलब्ध विकल्पों के बारे में बैंक से जानकारी लें।

लोन लेते समय इन बातों का ध्यान रखें—

• उतना ही लोन लें, जितना आसानी से चुका सकें।

• EMI समय पर भरें।

• लोन एग्रीमेंट की शर्तें ध्यान से पढ़ें।

• क्रेडिट स्कोर पर नजर रखें।

• रिकवरी नोटिस को नजरअंदाज न करें।

• किसी गलत या अनुचित रिकवरी व्यवहार की स्थिति में संबंधित शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करें।

सीधी बात यह है कि RBI के नए नियम बैंक को पैसा वसूलने से नहीं रोकते, बल्कि यह तय करते हैं कि वसूली किस तरीके से की जाए। ग्राहक का कर्ज चुकाना जरूरी है, लेकिन रिकवरी के नाम पर उसकी निजता, सम्मान और अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।

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