नैनीताल: उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम में बाबा नीम करौली के दर्शन करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए आने वाले दिनों में यात्रा के नियम बदल सकते हैं। मंदिर में लगातार बढ़ती भीड़, लंबा ट्रैफिक जाम और दर्शन के दौरान होने वाली अव्यवस्था को देखते हुए जिला प्रशासन ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर पहले से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह प्रस्ताव है और शासन की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।
अब बिना रजिस्ट्रेशन कैंची धाम जाना हो सकता है मुश्किल!
आपको बता दें कि कैंची धाम में सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खासकर छुट्टियों, सप्ताहांत और विशेष अवसरों पर यहां भीड़ काफी बढ़ जाती है। इसका असर केवल मंदिर परिसर पर ही नहीं, बल्कि हल्द्वानी-अल्मोड़ा हाईवे पर भी दिखाई देता है। वाहनों की लंबी कतारों से स्थानीय लोगों और पहाड़ी क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसी समस्या से निपटने के लिए नैनीताल जिला प्रशासन ने पंजीकरण व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार करके उत्तराखंड पर्यटन विभाग को भेजा है। योजना के अनुसार, चारधाम यात्रा की तरह कैंची धाम के लिए भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की अलग सुविधा विकसित की जा सकती है।
रोजाना 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की सीमा तय करने की तैयारी
गौरतलब है कि प्रस्ताव में कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया है। क्षेत्र की क्षमता और हाईवे पर वाहनों के दबाव को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन लगभग 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। यदि निर्धारित संख्या पूरी हो जाती है, तो वेबसाइट पर उस दिन के लिए पंजीकरण बंद हो सकता है। ऐसी स्थिति में श्रद्धालुओं को किसी दूसरी तारीख का विकल्प चुनना पड़ सकता है। इससे अचानक उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और मंदिर क्षेत्र में व्यवस्थाएं बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
होटल, ठहरने और पार्किंग की जानकारी भी देनी पड़ सकती है
प्रस्तावित व्यवस्था में श्रद्धालुओं से केवल पंजीकरण ही नहीं, बल्कि उनके ठहरने और वाहन पार्क करने से जुड़ी जानकारी भी मांगी जा सकती है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि कितने लोग निजी वाहनों से आ रहे हैं और उनके लिए पार्किंग की क्या व्यवस्था है। योजना के तहत हल्द्वानी में निर्धारित स्थानों पर वाहनों की पार्किंग कराकर आगे कैंची धाम तक शटल सेवा चलाने का विकल्प भी रखा गया है। इससे हाईवे पर वाहनों का दबाव कम करने और स्थानीय आवागमन को सुचारु बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
हल्द्वानी में बैरियर पर हो सकती है रजिस्ट्रेशन की जांच
प्रस्ताव के मुताबिक, दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के पंजीकरण की जांच हल्द्वानी क्षेत्र में बनाए जाने वाले बैरियर पर की जा सकती है। यहां पंजीकरण की जानकारी देखने के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे जाने की अनुमति देने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों को परेशानी से बचाने के लिए पहचान पत्र के आधार पर प्रवेश देने का विकल्प भी प्रस्ताव में शामिल बताया गया है। हालांकि, स्थानीय निवासियों के लिए लागू होने वाले नियमों की अंतिम तस्वीर शासन की मंजूरी और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं पंजीकरण व्यवस्था की बात
विदित है कि कैंची धाम में भीड़ प्रबंधन का मुद्दा प्रशासन के साथ-साथ सरकार के स्तर पर भी उठ चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नौ अक्टूबर को हल्द्वानी में आयोजित व्यापारी सम्मेलन में कैंची धाम के लिए पंजीकरण व्यवस्था और श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित करने की बात कही थी। नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के अनुसार, श्रद्धालुओं के पंजीकरण को लेकर प्रस्ताव तैयार करके पर्यटन विभाग को भेज दिया गया है। शासन की स्वीकृति मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।
फिलहाल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य नियम प्रस्तावित स्टेज में हैं। जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा और पंजीकरण की तारीख जारी नहीं होती, तब तक व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है। कैंची धाम जाने से पहले प्रशासन की आधिकारिक सूचना जरूर जांचें, ताकि यात्रा के दौरान किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।