नई दिल्ली : किसानों के लिए खेती की जरूरतों को पूरा करने में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) काफी उपयोगी वित्तीय सुविधा है। इसके जरिए किसान खेती से जुड़े खर्चों के लिए बैंक से ऋण सुविधा ले सकते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, KCC के तहत ₹3 लाख तक के ऋण पर 7% की ब्याज दर का प्रावधान है और पात्र मामलों में समय पर भुगतान करने पर ब्याज में प्रोत्साहन के कारण प्रभावी दर 4% तक हो सकती है।
किसान क्रेडिट कार्ड क्या है?
आपको बता दें कि किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को खेती के लिए जरूरी वित्तीय जरूरतें पूरी करने के उद्देश्य से दिया जाने वाला ऋण-सुविधा कार्ड है। इससे किसान बीज, खाद, कीटनाशक, कृषि उपकरण और खेती से जुड़े दूसरे खर्चों के लिए रकम का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुविधा केवल बड़े किसानों तक सीमित नहीं है। पात्र छोटे और सीमांत किसान भी अपनी कृषि जरूरतों के अनुसार KCC के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कितना लोन और कितना ब्याज?
गौरतलब है कि KCC के तहत ₹3 लाख तक के ऋण पर 7% ब्याज दर बताई गई है। समय पर ऋण चुकाने वाले पात्र किसानों को ब्याज में अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है, जिससे प्रभावी ब्याज दर 4% तक रह सकती है। हालांकि, वास्तविक ऋण सीमा, ब्याज, सुरक्षा/गारंटी और अन्य शर्तें बैंक, ऋण के प्रकार तथा किसान की पात्रता के अनुसार अलग हो सकती हैं।
कितनी जमीन होना जरूरी?
KCC के लिए जमीन की कोई एक समान न्यूनतम सीमा सभी किसानों के लिए तय नहीं है। किसान की खेती, फसल और प्रस्तावित ऋण सीमा के आधार पर बैंक ऋण क्षमता तय करता है। अपनी जमीन के अलावा पट्टे या किराये पर ली गई कृषि भूमि पर खेती करने वाले किसान भी पात्रता पूरी होने पर KCC के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज?
KCC के लिए आम तौर पर इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है—
आधार कार्ड
पहचान और पते का प्रमाण
जमीन के कागजात/खसरा-खतौनी या संबंधित रिकॉर्ड
पासपोर्ट साइज फोटो
मोबाइल नंबर
PAN कार्ड, जहां बैंक द्वारा आवश्यक हो
बैंक द्वारा मांगे गए अन्य कृषि या आय संबंधी दस्तावेज
दस्तावेजों की सूची बैंक और आवेदक की स्थिति के अनुसार बदल सकती है।
कैसे करें आवेदन?
किसान KCC के लिए नजदीकी बैंक शाखा में जाकर आवेदन कर सकते हैं। कई बैंक ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी देते हैं। आवेदन के बाद बैंक किसान की पात्रता, भूमि/फसल संबंधी जानकारी और ऋण आवश्यकता की जांच करता है। स्वीकृति के बाद बैंक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार KCC सुविधा उपलब्ध कराता है।
लोन नहीं चुकाया तो क्या होगा?
विदित है कि KCC भी एक ऋण है, इसलिए इसे समय पर चुकाना जरूरी है। भुगतान में देरी होने पर बैंक की ओर से नियमानुसार नोटिस और वसूली की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर खाता NPA की श्रेणी में जा सकता है।
इसलिए किसान KCC लेते समय ऋण की शर्तें, ब्याज, पुनर्भुगतान की तारीख और बैंक की सुरक्षा संबंधी शर्तें अच्छी तरह समझ लें। KCC खेती की जरूरतों के लिए सस्ता ऋण उपलब्ध कराने का माध्यम है, लेकिन इसका लाभ तभी सुरक्षित रहता है जब किसान समय पर भुगतान की योजना बनाकर ऋण लें।