अलीगढ: ताला और तालीम के नाम से देश-दुनिया में पहचान बना चुका अलीगढ़ अब एक और बड़ी पहचान हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। शहर में देश का पहला लॉक म्यूजियम एवं अर्बन कल्चरल सेंटर बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दे दी है। करीब 37 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए पहली किस्त के तौर पर 10.23 करोड़ रुपये भी जारी किए जा चुके हैं। यह म्यूजियम सिर्फ तालों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा। यहां अलीगढ़ के करीब 100 साल पुराने ताला उद्योग की यात्रा, पारंपरिक कारीगरों की मेहनत और पुराने तालों से लेकर आधुनिक स्मार्ट लॉक तक की तकनीकी विकास यात्रा को आकर्षक अंदाज में दिखाया जाएगा।
जवाहर भवन के सामने बनेगा खास म्यूजियम
आपको बता दें कि प्रस्तावित लॉक म्यूजियम जवाहर भवन के सामने राजा महेंद्र प्रताप पार्क के किनारे विकसित किया जाएगा। नगर निगम के अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण कर आगे की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। परियोजना की डिजाइन और डीपीआर को मंजूरी मिल चुकी है और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार की ओर से स्वीकृत राशि में से 35 प्रतिशत यानी 10 करोड़ 23 लाख 83 हजार 144 रुपये की पहली किस्त जारी हुई है। अधिकारियों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
पुराने तालों से स्मार्ट लॉक तक दिखेगा पूरा सफर
गौरतलब है कि म्यूजियम की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा कॉन्सेप्ट होगा। यहां पुराने समय में ताला बनाने की प्रक्रिया को मॉडल और कार्यशाला के जरिए समझाया जाएगा। इसके साथ ही औपनिवेशिक दौर में अलीगढ़ के तालों के व्यापार और निर्यात की कहानी भी प्रदर्शित की जाएगी। म्यूजियम में स्मार्ट लॉक, बायोमेट्रिक सिस्टम, फेस रिकॉग्निशन और साइबर सिक्योरिटी जैसी आधुनिक तकनीकों से जुड़ी इंटरैक्टिव गैलरी भी प्रस्तावित है। यानी आगंतुकों को ताले के पुराने दौर से लेकर डिजिटल सुरक्षा के आधुनिक दौर तक का अनुभव एक ही जगह मिलेगा।
बड़ी कंपनियों के तालों की भी होगी गैलरी
अलीगढ़ की प्रमुख लॉक कंपनियों और ब्रांडों के उत्पादों को भी यहां प्रदर्शित करने की तैयारी है। बजाज, हैरिसन, लिंक और गोदरेज जैसी कंपनियों के तालों को अलग-अलग गैलरी में जगह देने की योजना है। जेवर एयरपोर्ट के जरिए अलीगढ़ आने वाले विदेशी खरीदारों और कारोबारियों के लिए भी यह म्यूजियम शहर के ताला उद्योग को समझने और उत्पाद देखने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
बच्चों के लिए किड्स जोन, पर्यटकों के लिए थीम कैफे
विदित है कि म्यूजियम को केवल इतिहास और उद्योग तक सीमित नहीं रखा जाएगा। यहां की-होल एंट्री, विशाल लॉक स्कल्पचर, डिजिटल ओरिएंटेशन डोम, मीडिया टनल, विश वॉल और की-एनग्रेविंग स्टेशन जैसी आकर्षक सुविधाएं होंगी। बच्चों के लिए विशेष किड्स जोन और पर्यटकों के लिए थीम आधारित कैफे-रेस्टोरेंट भी प्रस्तावित है। अलीगढ़ के कारीगरों की जीवनगाथा, लोककथाओं, भारतीय सिनेमा और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को भी विशेष दीर्घाओं में दिखाया जाएगा।
अलीगढ़ की पहचान को मिलेगा नया मंच
इस परियोजना का उद्देश्य अलीगढ़ की औद्योगिक विरासत को पर्यटन, तकनीक और संस्कृति से जोड़ना है। म्यूजियम बनने के बाद स्कूली बच्चों, स्थानीय लोगों, कारोबारियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को ताला उद्योग की पूरी कहानी एक ही स्थान पर देखने को मिल सकेगी।
लंबे समय से प्रस्तावित इस परियोजना के लिए जून 2025 में शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। अब मंजूरी और पहली किस्त जारी होने के बाद अलीगढ़ के इस खास म्यूजियम का रास्ता साफ हो गया है।