ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा में जमीन देने वाले किसानों के लिए 27 अगस्त 2026 का दिन बेहद अहम साबित हुआ। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने किसानों के मुआवजे में रिकॉर्ड 55.5 फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। अब जमीन के लिए किसानों को 6415 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा मिलेगा। मौजूदा दर 4125 रुपये प्रति वर्ग मीटर थी। यानी सीधे 2290 रुपये प्रति वर्ग मीटर की एकमुश्त बढ़ोतरी की गई है।
इतना ही नहीं, करीब 10 साल बाद किसानों के लिए 6 फीसदी आबादी भूखंड देने की व्यवस्था भी फिर से लागू कर दी गई है। इस फैसले ने जमीन देने वाले किसानों के लिए मुआवजे के साथ भविष्य में संपत्ति के रूप में लाभ पाने का रास्ता भी खोल दिया है।
10 साल बाद फिर मिलेगा 6 फीसदी आबादी भूखंड
आपको बता दें कि प्राधिकरण बोर्ड ने 6 फीसदी आबादी भूखंड देने की पुरानी व्यवस्था को दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। वर्ष 2016 में यह प्रावधान समाप्त कर दिया गया था। अब पात्र किसानों को अलग-अलग विकसित किए जाने वाले सेक्टरों में आबादी भूखंड दिए जाएंगे। खास बात यह है कि जमीन की रजिस्ट्री प्राधिकरण के पक्ष में होते समय ही किसान को आबादी भूखंड का आरक्षण पत्र जारी कर दिया जाएगा। इससे किसानों को अपने भूखंड के लिए लंबे समय तक दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। आबादी भूखंड का आकार कम से कम 40 वर्ग मीटर और अधिकतम 2500 वर्ग मीटर रखा गया है। प्रमुख मार्गों से लगी जमीन वाले किसानों को आबादी भूखंड के आवंटन में प्राथमिकता देने का भी फैसला हुआ है।
मुआवजे की दर में पहली बार इतनी बड़ी छलांग
गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा में मुआवजे की दर में इस बार हुई बढ़ोतरी को इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले दर में इतनी बड़ी एकमुश्त वृद्धि नहीं हुई थी। दर का सफर देखें तो 2014-15 में किसानों को 3500 रुपये प्रति वर्ग मीटर मिलते थे। 2022-23 में यह बढ़कर 3750 रुपये और 2023-24 में 4125 रुपये हुई। इसके बाद 2026-27 में सीधे 6415 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर मंजूर की गई है। हालांकि, जो किसान 6 फीसदी आबादी भूखंड का विकल्प लेंगे, उनके लिए मुआवजा दर 5725 रुपये प्रति वर्ग मीटर रहेगी।
जमीन देने के साथ परिसंपत्तियों का भी मिलेगा मुआवजा
प्राधिकरण ने किसानों की सुविधा के लिए जमीन खरीद की प्रक्रिया को भी आसान बनाने का फैसला किया है। एसीईओ की अध्यक्षता में जमीन अधिग्रहण सेल गठित किया जाएगा। इसका उद्देश्य जमीन की खरीद से जुड़ी प्रक्रिया में किसानों की मदद करना और उन्हें अनावश्यक भागदौड़ से बचाना है। मुआवजे की रकम पारदर्शी तरीके से सीधे किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इसके अलावा जमीन पर मौजूद परिसंपत्तियों के लिए किसानों को अलग से मुआवजा दिए जाने का प्रावधान भी रहेगा।
किसानों को अब क्या फायदा होगा?
विदित है कि इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन किसानों पर पड़ेगा जिनकी जमीन ग्रेटर नोएडा के विकास कार्यों के लिए ली जानी है। बढ़ी हुई मुआवजा दर से उन्हें जमीन की कीमत पहले के मुकाबले काफी अधिक मिलेगी। वहीं 6 फीसदी आबादी भूखंड की व्यवस्था दोबारा शुरू होने से जमीन देने वाले पात्र किसानों को भविष्य में विकसित क्षेत्र में अपनी जमीन का विकल्प भी मिल सकेगा।
प्राधिकरण का कहना है कि किसानों का योगदान ग्रेटर नोएडा के विकास की नींव में रहा है। ऐसे में यह फैसला किसानों को केवल मुआवजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें क्षेत्र के विकास और उससे बनने वाली आर्थिक संभावनाओं में भागीदार बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।