मुंबई/मनोरंजन: हिंदी सिनेमा में अमिताभ बच्चन का नाम आते ही दमदार आवाज, शानदार संवाद और यादगार किरदारों की तस्वीर सामने आ जाती है। पांच दशक से अधिक समय से फिल्मों में सक्रिय बिग बी ने अपने अभिनय से कई पीढ़ियों को प्रभावित किया है। 11 अक्टूबर को अपना 84वां जन्मदिन मना रहे महानायक का सफर केवल हिट फिल्मों तक सीमित नहीं है। उनके खाते में बड़े पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय पहचान और ऐसे किरदार भी हैं, जिन्हें आज तक याद किया जाता है।
‘जंजीर’ ने बदली किस्मत, ‘शोले’ ने बनाया सुपरस्टार
आपको बता दें कि अमिताभ बच्चन ने 1969 में फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। हालांकि, उन्हें असली पहचान 1973 में आई ‘जंजीर’ से मिली। इस फिल्म ने उनकी ‘एंग्री यंग मैन’ वाली छवि को मजबूत किया। इसके बाद ‘दीवार’, ‘शोले’, ‘डॉन’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘त्रिशूल’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के बड़े सितारों में शामिल कर दिया। एक्शन और गंभीर भूमिकाओं के साथ उन्होंने कॉमेडी तथा पारिवारिक फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा दिखाई।
मैडम तुसाद में प्रतिमा लगने से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता ने वर्ष 2000 में एक खास अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की, जब लंदन के मैडम तुसाद संग्रहालय में उनकी मोम की प्रतिमा स्थापित की गई। वह इस संग्रहालय में जगह पाने वाले पहले भारतीय फिल्म सितारे और पहले बॉलीवुड अभिनेता बने। यह उपलब्धि उस दौर में भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान के लिहाज से खास मानी गई। उनकी लोकप्रियता फिल्मों के अलावा टेलीविजन और विज्ञापन जगत तक भी पहुंची।
चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित हुए बिग बी
विदित है कि अमिताभ बच्चन को अभिनय के लिए चार बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है। उन्हें ये सम्मान ‘अग्निपथ’, ‘ब्लैक’, ‘पा’ और ‘पीकू’ में उनके अभिनय के लिए मिले। ‘अग्निपथ’ में विजय दीनानाथ चौहान का उनका किरदार गुस्से और बदले की भावना के लिए याद किया जाता है। ‘ब्लैक’ में उन्होंने शिक्षक देबराज सहाय की भूमिका निभाई, जबकि ‘पा’ में वह ऑरो नाम के बच्चे के रूप में नजर आए। ‘पीकू’ में एक जिद्दी लेकिन भावुक पिता के किरदार ने उनके अभिनय का अलग रंग दिखाया।
असल जिंदगी में पिता, फिल्म में बने बेटे
वर्ष 2009 में रिलीज हुई ‘पा’ की सबसे दिलचस्प बात अमिताभ और अभिषेक बच्चन की भूमिकाएं थीं। वास्तविक जीवन में पिता-पुत्र होने के बावजूद फिल्म में अमिताभ ने अभिषेक के बेटे का किरदार निभाया। ऑरो के रूप में अमिताभ का रूपांतरण भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना।
‘कौन बनेगा करोड़पति’ ने घर-घर पहुंचाया
गौरतलब है कि साल 2000 में अमिताभ बच्चन ने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के जरिए टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा। प्रतियोगियों से बातचीत करने का उनका सहज अंदाज और सवाल पूछने की शैली कार्यक्रम की पहचान बन गई। इस शो ने उन्हें उन दर्शकों तक भी पहुंचाया, जो शायद उनकी फिल्में नियमित रूप से नहीं देखते थे।
पद्म सम्मानों से दादासाहेब फाल्के पुरस्कार तक
अमिताभ बच्चन को 1984 में पद्मश्री, 2001 में पद्म भूषण और 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्हें वर्ष 2018 के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भी प्रदान किया गया।
‘सात हिंदुस्तानी’ से शुरू हुआ उनका सफर ‘कल्कि 2898 AD’ जैसी फिल्मों तक पहुंच चुका है। बदलते दौर में नए किरदार अपनाना और दर्शकों से जुड़ाव बनाए रखना ही अमिताभ बच्चन की लंबी फिल्मी पारी की सबसे बड़ी पहचान है।