हरियाणा: हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा एक बार फिर कथित पाखंडवाद और बाबाओं-डेरों को लेकर दिए अपने बयान से चर्चा में हैं। जींद के पदाना धाम श्याम मंदिर में आयोजित भजन संध्या के दौरान उन्होंने पाखंडवाद के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी और लोगों से ऐसे लोगों से सावधान रहने की अपील की। मासूम शर्मा ने कार्यक्रम में अपने चर्चित गीत ‘तत्वदर्शी’ का जिक्र करते हुए कहा कि समाज को पाखंडवाद से बचाने के लिए लोगों को आवाज उठानी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने बेहद तीखे और विवादित अंदाज में कहा कि ऐसे लोग जहां भी फंसें, वहां उनका विरोध किया जाना चाहिए। उनके इस बयान का वीडियो अब चर्चा में है।
‘माता-पिता के पैर छूने चाहिए’
आपको बता दें कि मासूम शर्मा ने लोगों से कहा कि किसी भी व्यक्ति को अंधभक्ति में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने माता-पिता के सम्मान पर जोर देते हुए कहा कि लोगों को अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए और किसी बाबा या कथित संत को भगवान का दर्जा देने से पहले सोच-विचार करना चाहिए। सिंगर ने यह भी कहा कि उन्होंने बड़ी संस्थाओं के खिलाफ खुलकर बोलने की हिम्मत दिखाई है। उनके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति पाखंड के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे डरना नहीं चाहिए। हालांकि, उनके बयान में इस्तेमाल किए गए कुछ बेहद तीखे शब्दों को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। उन्होंने लोगों से ऐसे कथित पाखंडियों का विरोध करने की अपील की।
‘अच्छी बात वायरल नहीं होती’
गौरतलब है कि मासूम शर्मा ने सोशल मीडिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अगर किसी मंच पर उनसे कोई आपत्तिजनक शब्द निकल जाए तो लोग उसे तेजी से शेयर करते हैं, लेकिन जब वह समाज और धर्म से जुड़ी अच्छी बातें कहते हैं तो उन्हें उतना प्रचार नहीं मिलता। उन्होंने लोगों से अपील की कि सकारात्मक और सामाजिक संदेशों को भी सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा साझा किया जाए।
‘तत्वदर्शी’ के बाद अब ‘फिल्मी बाबा’
बाबाओं और डेरों को लेकर मासूम शर्मा का विरोध नया नहीं है। इससे पहले उन्होंने ‘तत्वदर्शी’ गाना रिलीज किया था, जिसमें उन्होंने कथित पाखंड और कुछ धार्मिक संस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्हें धमकियां मिलने का भी दावा किया गया था। अब उनका नया गाना ‘फिल्मी बाबा’ भी इसी मुद्दे को आगे बढ़ाता है। 8 सितंबर को जारी किए गए इस ट्रैक में कथित पाखंडी बाबाओं और डेरों पर तीखे कटाक्ष किए गए हैं। गाने में ऐसे लोगों पर मानवता और धर्म के नाम पर लोगों को प्रभावित करने के आरोपों को गीतों के जरिए उठाया गया है।
‘जो जी चाहूंगा, वही लिखूंगा’
विदित है कि ‘फिल्मी बाबा’ में मासूम शर्मा और लेखक अमर करनावल ने अपने बेबाक अंदाज को सामने रखा है। गाने का संदेश मुख्य रूप से लोगों को जागरूक करने और कथित पाखंड से बचने पर केंद्रित है। कार्यक्रम में कलाकार हैरी लाठर और सुरेंद्र रोमियो समेत अन्य कलाकारों ने भी भजन प्रस्तुत किए। हैरी लाठर ने भी पाखंड के खिलाफ बोलते हुए कहा कि कुछ लोग इसकी आड़ में गलत गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपने माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानने की अपील की।
मासूम शर्मा के लगातार दो गानों और मंच से दिए गए बयानों ने एक बार फिर बाबाओं, डेरों, अंधभक्ति और पाखंडवाद को लेकर बहस तेज कर दी है। अब देखना होगा कि उनके इन बयानों पर धार्मिक संगठनों और संबंधित पक्षों की क्या प्रतिक्रिया आती है।