प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य से माफी माँगने को तैयार!: दो शर्तों पर अड़े अविमुक्तेश्वरानंद, लखनऊ से भेजे गए टॉप अफसर; विस्तार से जानें क्या है पूरा मामला_एक नज़र
प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य से माफी माँगने को तैयार!

प्रयागराज : प्रयागराज माघ मेला विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। 11 दिनों तक चले टकराव के बाद आखिरकार प्रयागराज प्रशासन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से माफी मांगने को तैयार हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस पूरे विवाद को माघ पूर्णिमा से पहले हर हाल में शांत करना चाहती है, ताकि मामला और न भड़के। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार का दावा है कि लखनऊ से दो बड़े अधिकारियों को वाराणसी भेजा गया है, जो खुद शंकराचार्य से संवाद कर उन्हें ससम्मान संगम स्नान के लिए मनाने की कोशिश करेंगे। लेकिन शंकराचार्य ने साफ कर दिया है कि बिना शर्त नहीं, सम्मान के साथ ही वापसी होगी।

माफी भी लिखित हो, प्रोटोकॉल भी तय हो :

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के सामने दो स्पष्ट शर्तें रख दी हैं -

  1. जिम्मेदार अधिकारियों की लिखित माफी

सिर्फ मौखिक खेद नहीं, बल्कि स्पष्ट और औपचारिक माफीनामा दिया जाए।

  1. चारों शंकराचार्यों के लिए स्थायी प्रोटोकॉल

माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ जैसे आयोजनों में चारों शंकराचार्यों का सम्मानजनक और घोषित प्रोटोकॉल तय किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।

इन शर्तों के पूरा होने पर ही वे प्रयागराज लौटकर माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान पर विचार करेंगे।

अचानक वाराणसी रवाना होना बना प्रशासन के लिए झटका :

विदित है कि प्रशासन को भरोसा था कि शंकराचार्य माघ पूर्णिमा तक प्रयागराज में रहेंगे और तब तक बात बन जाएगी। लेकिन 28 जनवरी की सुबह उनका अचानक माघ मेला छोड़कर वाराणसी चले जाना पूरी रणनीति पर पानी फेर गया। यही वह पल था, जब मामला हाथ से फिसल गया और सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।

सरकार क्यों झुकी? अंदरूनी दबाव और सड़कों तक गूंज :

सूत्र बताते हैं कि शंकराचार्य प्रकरण पर संत समाज में जबरदस्त नाराज़गी थी, सोशल मीडिया पर लगातार ट्रेंड चल रहा था। सरकार के भीतर भी मतभेद उभरने लगे थे। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य खुले तौर पर शंकराचार्य के समर्थन में दिखे। इन सबके बीच सरकार को अंदेशा हुआ कि अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो धार्मिक असंतोष राजनीतिक संकट में बदल सकता है।

मौनी अमावस्या पर टकराव, जानें पूरा विवाद :

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन उस वक्त भड़का, जब शंकराचार्य के शिष्यों और प्रशासन के बीच टकराव हुआ। शंकराचार्य समर्थकों का आरोप है कि उनके साथ प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ, सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया और माफी की मांग को नजरअंदाज किया गया, यहीं से टकराव बढ़ता चला गया और आखिरकार शंकराचार्य ने माघ मेला छोड़ने का फैसला कर लिया।

अब क्या होगा आगे?

अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यहीं साफ होगा कि क्या प्रशासन शर्तें मानता है? क्या लिखित माफी दी जाती है? क्या शंकराचार्य माघ पूर्णिमा पर संगम स्नान के लिए प्रयागराज लौटेंगे?

एक बात तय है यह सिर्फ एक स्नान का मामला नहीं, बल्कि सनातन सम्मान और प्रशासनिक मर्यादा की बड़ी परीक्षा बन चुका है।

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