दिल्ली-NCR से बाहर हो सकतें हैं हरियाणा के ये 5 जिले!: 100 KM के दायरे में सिमट सकता है NCR, 60% क्षेत्र हो सकतें हैं कम, जानिए कौन से 5 जिले हो सकतें बाहर और इसके पीछे की बड़ी वजह, एक नजर
दिल्ली-NCR से बाहर हो सकतें हैं हरियाणा के ये 5 जिले!

नई दिल्ली/हरियाणा : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमाओं को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दिल्ली में होने वाली NCR प्लानिंग बोर्ड की अहम बैठक में NCR के दायरे को नए सिरे से तय करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। अगर प्रस्ताव पर सहमति बनती है तो हरियाणा के कई जिलों की तस्वीर बदल सकती है। नए फॉर्मूले के तहत NCR को दिल्ली के राजघाट से करीब 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित करने का सुझाव दिया गया है। ऐसा होने पर हरियाणा का करीब 60 प्रतिशत NCR क्षेत्र बाहर हो सकता है।

हरियाणा के 5 जिलों पर सबसे ज्यादा असर

आपको बता दें कि मौजूदा समय में हरियाणा के 14 जिले NCR क्षेत्र में शामिल हैं और इनका कुल क्षेत्रफल करीब 25,327 वर्ग किलोमीटर है। नया फॉर्मूला लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर लगभग 10,546 वर्ग किलोमीटर रह सकता है। यानी करीब 15 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र NCR से बाहर हो सकता है।

सबसे ज्यादा असर इन जिलों पर पड़ सकता है—

  • करनाल

  • जींद

  • महेंद्रगढ़

  • भिवानी

  • चरखी दादरी

ये जिले 100 किलोमीटर के दायरे की सीमा के आसपास आते हैं।

दिल्ली में अहम बैठक, बड़े फैसले की उम्मीद

दिल्ली में NCR प्लानिंग बोर्ड की 42वीं बैठक हो रही है। बैठक में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं। इस बैठक में रीजनल प्लान-2041 और NCR की सीमा को लेकर चर्चा हो सकती है।

महेंद्रगढ़ और जींद पर ज्यादा असर

गौरतलब है कि सीमा बदलने की स्थिति में सबसे ज्यादा प्रभाव महेंद्रगढ़ जिले पर पड़ सकता है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा प्रस्तावित 100 किलोमीटर सीमा से बाहर आता है। जींद भी सीमा के करीब होने के कारण प्रभावित हो सकता है। वहीं करनाल और पानीपत जैसे क्षेत्रों को राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर की वजह से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

हाईवे कॉरिडोर से बच सकते हैं कुछ इलाके

हरियाणा सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि NCR क्षेत्र में शामिल रखने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों तरफ एक-एक किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर रखा जाए। इससे NH-44 से जुड़े करनाल और पानीपत जैसे क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है। भिवानी और चरखी दादरी के कुछ हिस्सों को भी हाईवे कनेक्टिविटी के आधार पर राहत मिल सकती है।

हरियाणा क्यों चाहता है NCR सीमा में बदलाव?

हरियाणा का तर्क है कि दिल्ली से काफी दूर स्थित जिलों को NCR में शामिल रहने का पूरा फायदा नहीं मिल रहा है। इन जिलों को NCR से जुड़े कई नियमों और प्रतिबंधों का पालन करना पड़ता है। खासकर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी पाबंदियों का असर निर्माण कार्यों, उद्योगों और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। सरकार का मानना है कि दूर के जिलों को प्रतिबंध ज्यादा झेलने पड़ते हैं, जबकि विकास का लाभ अपेक्षा के मुताबिक नहीं मिलता।

पहले शामिल करवाया, फिर बदला रुख

आपको बता दें कि साल 2015 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मनोहर लाल खट्टर ने करनाल और जींद को NCR में शामिल करवाने को बड़ी उपलब्धि बताया था। इसके बाद हरियाणा का करीब 57 प्रतिशत हिस्सा NCR में आ गया था। लेकिन 2021 में उन्होंने कहा था कि दिल्ली से 100 किलोमीटर से ज्यादा दूर के क्षेत्रों को NCR में रखने का ज्यादा फायदा नहीं है और सीमा की समीक्षा होनी चाहिए।

निवेश और विकास नीति पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर जिले NCR से बाहर होते हैं तो वहां की विकास योजना, निवेश और औद्योगिक रणनीति पर असर पड़ सकता है। ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास मॉडल तैयार करना जरूरी होगा, ताकि रोजगार और निवेश की रफ्तार बनी रहे।

अब सबकी नजर NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक पर है, जहां से आने वाला फैसला हरियाणा और दिल्ली-NCR के भविष्य का नक्शा बदल सकता है।

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