अयोध्या : करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े चढ़ावे की धनराशि में कथित गड़बड़ी के मामले ने बड़ा मोड़ ले लिया है। लगातार उठ रहे सवालों और चर्चाओं के बीच अब उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की गहराई से जांच कराने के लिए विशेष जांच समिति (SIT) का गठन कर दिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग के बाद बनाई गई यह तीन सदस्यीय टीम दान राशि के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और कथित हेरफेर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।
तीन वरिष्ठ अधिकारियों को मिली जांच की जिम्मेदारी
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार की ओर से गठित SIT की कमान वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई है। समिति की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत करेंगे। इसके साथ आईजी रेंज किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को सदस्य बनाया गया है। यह टीम मंदिर में आने वाले चढ़ावे, उसकी गिनती, रिकॉर्ड और धनराशि की सुरक्षा से जुड़े पूरे सिस्टम की पड़ताल करेगी।
7 दिन में पहली रिपोर्ट, 15 दिन में पूरी जांच
गौरतलब है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए समय सीमा भी तय की गई है। SIT को 7 दिन के अंदर शुरुआती जांच रिपोर्ट और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और अगर किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारों पर शिकंजा कस सकता है।
करोड़ों की हेरफेर के आरोपों से मचा हड़कंप
जानकारी के मुताबिक, मंदिर की दान राशि से जुड़े मामले में बड़ी रकम की गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। जांच के दौरान अब तक करोड़ों रुपये की रिकवरी होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ और मिले सुरागों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि वास्तविक गड़बड़ी कितनी बड़ी थी और इसमें कौन-कौन शामिल था।
नकदी, बैंक खातों और निवेश की भी होगी पड़ताल
जांच में केवल गायब हुई रकम ही नहीं बल्कि उससे जुड़े संभावित निवेश की भी पड़ताल की जा रही है। संदिग्धों के बैंक खाते, संपत्ति और अन्य लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश होगी कि अगर धनराशि का दुरुपयोग हुआ तो वह पैसा कहां और कैसे इस्तेमाल किया गया।
CCTV और रिकॉर्ड बन सकते हैं अहम सबूत
मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों और दान राशि की गिनती से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच में अहम भूमिका निभाContextMenu कर सकते हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि चढ़ावे की राशि के प्रबंधन में कहीं कोई सुरक्षा चूक हुई या व्यवस्था में ऐसी कमी थी, जिसका फायदा उठाया गया।
ट्रस्ट की मांग के बाद स्वतंत्र जांच का फैसला
आपको बता दें कि पहले मामले को लेकर आंतरिक स्तर पर जांच की बात सामने आई थी, लेकिन विवाद बढ़ने और अलग-अलग सवाल उठने के बाद ट्रस्ट ने सरकार से स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया। इसके बाद SIT बनाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का निर्णय लिया गया।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
राम मंदिर देश के सबसे बड़े आस्था केंद्रों में से एक है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। SIT जांच के बाद यह साफ होगा कि मामला लापरवाही का था या इसके पीछे कोई सुनियोजित गड़बड़ी थी। फिलहाल सभी की नजरें आने वाली जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।