लाइफस्टाइल : अगर आपको लगता है कि रील्स सिर्फ टाइमपास हैं तो संभल जाइए! वैज्ञानिक अब साफ कह रहे हैं कि घंटों तक रील्स स्क्रॉल करना आपके दिमाग को “धीमा, सुस्त और इंपल्सिव” बना रहा है। ये आदत इतनी खतरनाक हो चुकी है कि इसे ब्रेन रॉट {Brain Rot} कहा जा रहा है। यानी दिमाग का धीरे-धीरे कमजोर होना।
रील्स की लत आपको किस ओर ले जा रही है? जानें ‘ब्रेन रॉट’ का सच :
आपको बता दें कि Gen-Z स्लैंग की तरह शुरू हुआ शब्द Brain Rot, अब वैज्ञानिकों की मेज पर गंभीर मुद्दा बन चुका है। लगातार स्क्रॉलिंग यानी दिमाग पर निरंतर हमला है। हर 2-3 सेकंड में बदलती वीडियो आपके ब्रेन को इतना ओवरस्टिमुलेट कर देती है कि वह बाकी चीजों में फोकस ही नहीं कर पाता। इसके लक्षण बेहद चौंकाने वाले हैं—
●दिमाग में धुंध
●निर्णय लेने में दिक्कत
●याददाश्त कमजोर
●चिड़चिड़ापन
●ऊर्जा की कमी
●किसी काम में कुछ मिनट भी ध्यान न लगना
वैज्ञानिक क्या कहते हैं? दिमाग का ग्रे मैटर तक हो रहा प्रभावित :
गौरतलब है कि 71 रिसर्च का एक बड़ा मेटा-एनालिसिस कहता है कि शॉर्ट वीडियो की लत सेल्फ कंट्रोल और फोकस को सीधे प्रभावित करती है। NeuroImage जर्नल में छपी स्टडी और आगे कहती है कि दिमाग का ग्रे मैटर तक घट सकता है। लोग ज्यादा इंपल्सिव, ईर्ष्यालु और मानसिक रूप से सुस्त हो जाते हैं। सारा खेल होता है डोपामाइन का। यानी हर नया रील से दिमाग में इनाम की घंटी बजती है फिर आप और स्क्रॉल करते रहते हैं फिर दिमाग “तुरंत मज़ा” का आदी बन जाता है।
रील्स दिमाग को कैसे नुकसान पहुंचाती हैं?
तुरन्त आनंद पाने का एक लूप
आपको बता दें कि रील्स जिस पर चलती हैं उसे कहते हैं - डोपामाइन हिट मेकैनिज़्म। हर स्वाइप पर दिमाग को मज़ा मिलता है, इसी कारण आप रुक ही नहीं पाते।
अटेंशन का समय घटना
विदित है कि कुछ सेकंड में वीडियो बदलने के कारण दिमाग की फोकस करने की क्षमता टूट जाती है।
नींद का सफाया
आपको बता दें कि रात को रील्स स्क्रॉल हो रहा है तो समझिए—
●गहरी नींद गायब
●सुबह सुस्ती
●दिनभर दिमाग स्लो
मानसिक अस्थिरता बढ़ती :
आपको बता दें कि बेचैनी, anxiety और इंपल्सिव रिएक्शन सब रील्स के ओवरस्टिम्यूलेशन का प्रभाव है।
क्या रील्स से दिमाग बिल्कुल खराब हो सकता है?
गौरतलब है कि अगर ज्यादा reels देखा जाए तो जरूर दिमाग खराब हो सकता है। डॉक्टर्स कह रहे हैं कि
"Excessive short content consumption rewires the brain like addiction."
यानि, रील्स दिमाग को उसी पैटर्न पर ले जाती हैं जिस पर नशे की लत चलती है।
जानें क्या है बचने का तरीका :
दिमाग बिल्कुल रबर की तरह होता है। जैसे बिगड़ता है, वैसे सुधर भी सकता है। इसके लिए -
●रील्स टाइम को छोटे-छोटे स्लॉट में बांटें
●सुबह-सुबह फोन न देखें।
●खाने और सोने से 1 घंटे पहले फोन बिल्कुल बंद
●नोटिफिकेशन OFF करके काम में फोकस बढ़ाएं
●दिमाग को शांत करने वाली गतिविधियाँ अपनाएं
रीडिंग
वॉक
म्यूजिक
पेंटिंग
●अपनी इमोशंस पहचानें
अक्सर लोग बोरियत और loneliness से भागने के लिए रील्स देखते हैं। आप बदले में
-किसी दोस्त से बात
-छोटा सा वॉक
-जर्नलिंग कर सकते हैं। जो कि ज्यादा फायदेमंद है।
रील्स देखना गलत नहीं है। पर अतिरिक्त स्क्रॉलिंग आपके दिमाग का “प्रोसेसिंग स्पीड” नष्ट कर रही है। अगर समय रहते कंट्रोल नहीं किया, तो ध्यान, याददाश्त, सोचने की क्षमता, इमोशनल हेल्थ सब पर गहरा असर होगा। दिमाग को बचाना है तो आज ही अपनी स्क्रॉलिंग टाइम कम करें।