डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचने के लिये CBI ने लॉन्च किया AI चैटबॉट 'ABHAY': फर्जी CBI नोटिस का मिनटों में होगा खुलासा, अब AI चैटबॉट बताएगा असली या नकली...जानें क्या हैं 'डिजिटल अरेस्ट' और कैसे काम करेगा यह चैटबॉट?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचने के लिये CBI ने लॉन्च किया AI चैटबॉट 'ABHAY'

सुरक्षा/तकनीकी : देश में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर फ्रॉड के मामलों के बीच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने बड़ा कदम उठाया है। लोगों को फर्जी नोटिस और ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए CBI ने AI आधारित नया चैटबॉट ‘ABHAY’ लॉन्च किया है। यह चैटबॉट खासतौर पर उन मामलों को रोकने के लिए तैयार किया गया है, जिनमें साइबर ठग खुद को CBI, पुलिस या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और फिर लाखों रुपये की ठगी कर लेते हैं।

देश में बढ़ रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’ का आतंक

आपको बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल अरेस्ट स्कैम तेजी से बढ़ा है। ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ (NCRP) के आंकड़ों के मुताबिक—

साल 2024 में डिजिटल अरेस्ट और उससे जुड़े साइबर अपराधों के 1.23 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए

इन मामलों में करीब 1935 करोड़ रुपये की ठगी हुई

2025 के शुरुआती दो महीनों में ही 17 हजार से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल लोग भी इस जाल में फंस रहे हैं।

क्या है ‘ABHAY’ चैटबॉट?

‘ABHAY’ एक AI बेस्ड हेल्पबॉट है, जिसे CBI ने तैयार किया है। इसका मकसद लोगों को यह जांचने में मदद करना है कि उनके पास आया CBI नोटिस असली है या नकली। अगर किसी को ईमेल, व्हाट्सऐप, SMS या वीडियो कॉल के जरिए CBI का नोटिस भेजा जाता है, तो वह इस चैटबॉट की मदद से उसकी सच्चाई जांच सकता है। CBI का दावा है कि यह भारत का पहला रियल टाइम नोटिस वेरिफिकेशन System है।

कैसे काम करेगा ‘ABHAY’?

गौरतलब है कि अगर किसी व्यक्ति को CBI के नाम पर नोटिस मिलता है, तो :

  • सबसे पहले CBI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  • वहां ‘ABHAY’ चैटबॉट ओपन करें।
  • नोटिस की डिटेल या डॉक्यूमेंट अपलोड करें।
  • AI सिस्टम नोटिस के फॉर्मेट, भाषा, पैटर्न और डिटेल का विश्लेषण करेगा।
  • कुछ ही मिनटों में पता चल जाएगा कि नोटिस असली है या फर्जी।

क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’?

विदित है कि डिजिटल अरेस्ट असल में साइबर ठगी का नया तरीका है। इसमें ठग खुद को CBI अधिकारी, पुलिस अधिकारी या ED या अन्य सरकारी एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे कहते हैं कि आपका नाम मनी लॉन्ड्रिंग में आया है, आपके खिलाफ केस दर्ज है, आपका आधार या बैंक अकाउंट अपराध में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद वीडियो कॉल, फर्जी नोटिस और धमकी देकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।

फर्जी CBI नोटिस की पहचान कैसे करें?

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर नोटिस में ये बातें हों, तो सतर्क हो जाएं। तुरंत पैसे जमा कराने का दबाव, डराने वाली भाषा, वीडियो कॉल पर “सीक्रेट जांच”, पर्सनल अकाउंट में पैसे भेजने की मांग, गलत स्पेलिंग या खराब भाषा और तुरंत कार्रवाई का दबाव।
याद रखें कोई भी असली जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती।

किसे सबसे ज्यादा निशाना बनाते हैं साइबर ठग?

साइबर अपराधी आमतौर पर बुजुर्ग लोगों, कम डिजिटल जानकारी रखने वालों, ज्यादा ऑनलाइन एक्टिव लोगों और जल्दी डरने या घबराने वालों को निशाना बनाते हैं। ठग विदेशी नंबरों (+44, +65 आदि) से कॉल कर डर का माहौल बनाते हैं।

अगर ऐसा कॉल आए तो क्या करें?

अगर कोई खुद को CBI या पुलिस अधिकारी बताकर धमकी दे, तो तुरंत ये कदम उठाएं:

घबराएं नहीं

कॉल काट दें

पैसे ट्रांसफर न करें

OTP, आधार या बैंक डिटेल साझा न करें

स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें

CBI वेबसाइट पर नोटिस वेरिफाई करें

1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें

अब साइबर ठगों के खिलाफ AI की एंट्री

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ABHAY’ जैसे AI सिस्टम आने वाले समय में साइबर अपराध रोकने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। CBI का कहना है कि यह सिर्फ एक चैटबॉट नहीं, बल्कि लोगों को “भय से मुक्त” करने की पहल है।

अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में दूसरी सरकारी एजेंसियां भी ऐसे AI वेरिफिकेशन सिस्टम लॉन्च कर सकती हैं।

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