नीम करौली बाबा का आज 125वां जन्मोत्सव; कैंची धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब!: वृंदावन से हावर्ड तक बाबा...जानें कौन थे नीम करौली बाबा जिन्हें खोजने आते थे स्टीव जॉब्स-मार्क जुकरबर्ग से लेकर?
नीम करौली बाबा का आज 125वां जन्मोत्सव; कैंची धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब!

नैनीताल: भारत आज उस संत का 125वां अवतरण दिवस मना रहा है, जिनके एक ‘राम-राम’ ने करोड़ों की किस्मत बदल दी। जिन्हें स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग, रिचर्ड अल्पर्ट जैसे वैश्विक दिग्गज भी अपना गुरुदेव मानते हैं।

फिरोजाबाद से कैंचीधाम तक; भक्ति और चमत्कारों की अलौकिक गाथा :

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 30 नवंबर 1900 को फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में एक साधारण बालक जन्मा। उसका नाम था, लक्ष्मी नारायण शर्मा। आगे चलकर नीम करोली बाबा के नाम से विश्वभर में पूज्य हो गया। मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी का जन्मदिवस आज शुद्ध भक्ति, कीर्तन और अनुष्ठानों के साथ देश-विदेश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। अकबरपुर, नैनीताल का कैंचीधाम, हनुमानगढ़ी हर जगह श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है।

10 साल की उम्र में वेद पढ़े, 13 में घर छोड़ साधना पर निकल पड़े :

गौरतलब है कि नीम करोली बाबा के पिता पंडित दुर्गा प्रसाद और माता कौशल्या देवी ने आध्यात्मिक संस्कार दिए। उन्होनें 10 वर्ष की आयु में बनारस जाकर वेद व्याकरण का अध्ययन किया। वे 13 वर्ष में घर छोड़ एक तपस्वी यात्रा की जो कि नीब करौरी, गुजरात, जंगलों, समाधियों की ओर रहा। लोगों ने उनको कई नाम दिए - लक्ष्मणदास, तलैया बाबा, तिकोनिया बाबा, चमत्कारी बाबा। 17 वर्ष की आयु में ही उन्होंने ऐसी सिद्धियां प्राप्त कर लीं, जिनकी कहानियां आज भी भक्तों को विस्मित कर देती हैं।

विश्वभर में बाबा की कृपा; स्टैनफोर्ड, हार्वर्ड से लेकर सिलिकॉन वैली तक :

गौरतलब है कि नीब करौरी बाबा का प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं। उनकी कृपा की कहानियां सुनकर:

● स्टीव जॉब्स - कैंचीधाम आए, जीवन बदला, Apple की दिशा बदली
● मार्क जुकरबर्ग - Facebook संकट में था, बाबा के मंदिर भेजा गया
● राम दास, लैरी ब्रिलिएंट, कृष्णदास; दुनिया के मशहूर अध्यात्मिक चेहरे उनके शिष्य बने।
● हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड में बाबा पर विशेष स्टडीज़ की।

बाबा के “सब सेवा है, सब प्रेम है” वाले संदेश ने वैश्विक चेतना को झकझोर दिया।

कैंची धाम; जहां भक्त कहते हैं: ‘यहां से कोई खाली हाथ नहीं लौटता’

आपको बता दें कि 1964 में स्थापित कैंचीधाम आज आधुनिक भारत का सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। हर 15 जून को मेगा भव्य मेला लगता है। यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं। बाबा के प्रति भक्तों का प्रेम दिखाने के लिए कम्बल चढ़ाया जाता है। रोजाना कैंचीधाम में ‘चमत्कार’ जैसी घटनाओं की गवाही भक्त देते हैं।

अद्भुत संत, जो पैर नहीं छूने देते थे :

बाबा कहते थे कि “मेरे चरण नहीं, हनुमान जी के चरण छूओ।” वे अपना चरण नहीं छूने देते थे। वे सीधे-साधे, आडंबरों से मुक्त जीवन जीते थे। भक्ति, सेवा और करुणा उनका सारा धर्म था।

बाबा का महाप्रयाण; लेकिन उपस्थिति आज भी महसूस होती है :

आपको बता दें कि 11 सितंबर 1973 को बाबा ने वृंदावन में देह त्याग किया। लेकिन उनके भक्त आज भी कहते हैं। “बाबा तो आज भी हमारे साथ चल रहे हैं बस अदृश्य स्वरूप में।” उनकी लीलाओं पर बनी किताब “Miracle of Love” आज भी विश्वभर में बेस्टसेलर है।

आज का दिन; 125वां जन्मोत्सव, ऊर्जा और आशीर्वाद का महासंगम :

आपको बता दें कि आज उनके 125वीं जन्मोत्सव पर अकबरपुर, कैंचीधाम, हनुमानगढ़ी हर जगह विशाल हवन, सत्संग, भजन-कीर्तन, भंडारे, औऱ बाबा की कथाएं चल रहीं है। आशीर्वाद पाने को भक्त उमड़ पड़े हैं। भक्तों का एकमत है कि “बाबा का नाम जपे बिना काम नहीं बनता"।

बाबा का संदेश जो आज भी उतना ही शक्तिशाली :

● सबको प्रेम दो
● सेवा ही सच्ची साधना
● किसी से बैर मत करो
● सरल रहो, सच्चे रहो
● हनुमान ही सबके रक्षक

125 साल बाद भी नीम करोली बाबा सिर्फ संत नहीं, चमत्कार हैं। उनकी कृपा से बदली किस्मतें, बदले जीवन, बदली दुनिया। आज 125वां जन्मोत्सव सिर्फ उत्सव नहीं चमत्कार की ऊर्जा का पर्व है। भक्तों में हर्षोल्लास है।

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