रिलेशनशिप में रेप के आरोप और सहमति से सम्बंध पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!: रिलेशनशिप टूटने पर नहीं लगा सकते रेप का आरोप, रेप तभी जब...जानें पूरी खबर
रिलेशनशिप में रेप के आरोप और सहमति से सम्बंध पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!

नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी अदालत ने सोमवार को एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसने हजारों रिलेशनशिप–बेस्ड रेप केसों की दिशा बदल दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लंबे समय तक आपसी सहमति से चले रिश्ते के टूट जाने पर रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने साफ कहा कि "सहमति से संबंध और जबरदस्ती में कानून को ठीक से फर्क करना होगा, वरना असली पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाएगा।"

तीन साल का रिश्ता टूटा, तो लगा रेप का आरोप कोर्ट ने कहा—गलत:

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह मामला महाराष्ट्र से जुड़ा था, जहां एक महिला ने वकील पर आरोप लगाया था कि उसने शादी का झूठा वादा कर कई बार उसके साथ रेप किया। लेकिन जांच में सामने आया कि—

रिश्ता 2022 से 2024 तक यानी पूरे 3 साल चला,

दोनों की नजदीकियां आपसी सहमति से थीं,

महिला ने रिश्ते के दौरान कभी रेप की शिकायत नहीं की,

पैसा न देने पर महिला ने केस दर्ज किया।

इस पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने FIR और चार्जशीट दोनों रद्द कर दी।

जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

  1. "रिश्ता खत्म हुआ तो रेप का केस? यह कानून का दुरुपयोग है"

गौरतलब है कि इस मामले में कोर्ट ने कहा - “यह ऐसा मामला नहीं जहां पुरुष ने सिर्फ यौन संबंधों के लिए महिला को बहकाया और बाद में छोड़ दिया।”

  1. “FIR खुद कहती है—रिश्ता सहमति से था”

विदित है कि कोर्ट ने हाईकोर्ट को भी फटकार लगाई और कहा कि उसने इस अहम तथ्य को नजरअंदाज किया।

  1. “झूठे मामले असली पीड़ितों को कमजोर करते हैं”

कोर्ट ने यह भी कहा कि “जब रेप जैसे गंभीर आरोप गुस्से या गलतफहमी में लगाए जाते हैं, तो इससे असली पीड़ितों को न्याय मिलना मुश्किल हो जाता है।”

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश :

सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि शादी न होने का मतलब रेप नहीं है। लंबा रिलेशनशिप को सहमति ही मानी जाएगी, जब तक जबरदस्ती के पुख्ता सबूत न हों। कानून सिर्फ असली पीड़ितों के लिए है, रिश्ते टूटने पर हथियार की तरह इस्तेमाल करने के लिए नहीं।

क्यों माना जा रहा है यह फैसला “गेम-चेंजर”?

गौरतलब है कि सहमति बनाम झूठे वादे के मामले कोर्ट में लगातार बढ़ रहे हैं। कई बार रिश्ते छोड़ने के बाद बदले की भावना से रेप केस कर दिया जाता है। यह फैसला ऐसे मामलों में नजीर पेश करता है।

यह फैसला साफ करता है कि सहमति का मतलब सहमति है, चाहे रिश्ता टूट जाए। रेप सिर्फ तब माना जाएगा जब जबरदस्ती, धोखा या दबाव साबित हो। कानून भावना पर नहीं, सबूतों पर चलेगा।

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